जबलपुर के व्यस्तम क्षेत्र में गंजीपुरा में भगवान श्रीगणेश का सिद्ध मंदिर है, इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा के समक्ष एक नारियल और एक जासौन का फूल अर्पित करने से सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित चंद्रिका प्रसाद दुबे ने बताया कि गंजीपुरा मेन रोड स्थित श्री सिद्ध शेषनाग गणेश मंदिर से जुड़ी काफी कथाएं प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में विराजमान भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा के संबंध में एक कथा काफी प्रचलित है।
कथा के अनुसार 1986 में क्षेत्र के कुछ मित्रों ने मिलकर इस स्थान पर गणेश उत्सव का शुभारंभ किया था, जहां हर वर्ष विभिन्न प्रकार की भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती थी। वर्ष 1996 में नागपुर में भगवान श्रीगणेश के प्रसिद्ध मंदिर गणेश टेकरी की मिट्टी लाकर, यहां उस मिट्टी की प्रतिमा बनाकर 10 दिवसीय गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
पंडित चंद्रिका प्रसाद दुबे ने बताया कि जब गणेश विसर्जन का समय आया, तो लोगों ने बहुत प्रयास किए, लेकिन गणेश टेकरी वाले प्रसिद्ध भगवान गणेश की आकृति वाली इस प्रतिमा को वहां से न हिला पाए। विघ्नहर्ता की प्रतिमा जेसीबी भी नहीं हटा सकी। जब भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा वहां से नहीं हट सकी तो भक्तों ने उसे वहीं स्थापित करने का निर्णय लिया। से स्वयंभू भगवन श्रीगणेश की प्रतिमा श्री सिद्ध शेषनाग गणेश के नाम से पूरे संस्कारधानी में प्रसिद्ध है।
पंडित चंद्रिका प्रसाद दुबे ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे की गई है, यहां विराजित होकर भगवान श्रीगणेश अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद दे रहे हैं।
भक्तों की आस्था है कि इस सिद्ध मंदिर में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। पंडित चंद्रिका प्रसाद दुबे ने बताया कि यहां स्थापित भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा के समक्ष एक नारियल और एक जासौन का फूल अर्पित करने से सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।











