Friday, April 24, 2026
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Paush Amavasya 2024: कब है पौष अमावस्या? स्नान-दान एवं पितरों के तर्पण के लिए सर्वश्रेष्ठ है ये दिन

सूर्यदेव को समर्पित पौष मास का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। पौष मास में भगवान श्री हरि विष्णु एवं सूर्यदेव की आराधना के साथ ही पौष मास में पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण करना शुभ माना जाता है। 

पौष मास की अमावस्या विशेष लाभदायी और शुभ मानी जाती है। सनातन मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की आराधन की जाती है। साथ ही इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अमावस्या के दिन निर्धनों व जरूतमंदों को दान-दक्षिणा देने से पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन स्नान-दान करने से पितरों पर आए संकट दूर हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ऐसी मान्यता है कि पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ होता है। यदि आपके लिए नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्नान के बाद सूर्य देव को अर्ध्य दें तथा इसके बाद पितरों का जल से तर्पण करें।

मान्यता ही कि इस दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपनी संतान से तर्पण, श्राद्ध, दान आदि की अपेक्षा रखते हैं। ​अगर आपके पितर आपसे कुपित हैं तो आपको पौष अमावस्या के दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि अवश्य करना चाहिए। इस दिन पंचबलि कर्म करने, यानि ब्राह्मण, गाय, कौआ, पक्षी आदि को भोजन कराने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

सनातन पंचांग के अनुसार इस वर्ष पौष अमावस्या की तिथि बुधवार 10 जनवरी को रात 8:10 बजे प्रारंभ होगी और गुरुवार 11 जनवरी को शाम 5:26 बजे पौष अमावस्या की तिथि का समापन होगा। उदयातिथि के अनुसार पौष अमावस्या गुरुवार 11 जनवरी को मनाई जाएगी। स्नान व दान-दक्षिणा का मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से लेकर सुबह 6:21 बजे तक रहेगा। पितरों के तर्पण के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:08 से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से सुबह 8:34 बजे तक है।

पौष अमावस्या के दिन सुबह के समय स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर अर्घ्य दें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और उपवास करें। जरूतमंदों को दान-दक्षिणा दें और शाम के समय पीपल के वृक्ष में दीपक जरूर जलाकर रखें। इस दिन तुलसी के पौधे की परिक्रमा करनी चाहिए।

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