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पौष मास 2025: इस दिन है पौष पूर्णिमा, जानें कब खत्म होंगे पूस का महीना और खरमास

हिन्दू धर्म में पौष मास को भगवान सूर्य नारायण को समर्पित माना गया है, पौष मास में भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का भी विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पौष मास में भगवान सूर्य नारायण का पूजन करना चाहिए और ऐसा करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि पौष मास में सूर्यदेव का पूजन करने से व्यक्ति को बृद्धि, विद्या और धन के क्षेत्र में लाभ होता है। पौष मास के प्रत्येक रविवार को व्रत करना और सूर्यदेव की आराधना करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ सोमवार 13 जनवरी 2025 को सुबह 5:03 बजे होगा और पूर्णिमा तिथि का समापन मंगलवार 14 जनवरी 2025 को तड़के 3:56 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार पौष पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान सोमवार 13 जनवरी 2025 को किया जाएगा।

इस वर्ष सोमवार 16 दिसंबर 2024 से पौष मास यानी पूस का महीना आरंभ हुआ था, जो सोमवार 13 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। पौष मास की पूर्णिमा तिथि सोमवार 13 जनवरी 2025 को होगी। मान्यता के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा के निमित्त स्नान और दान सोमवार 13 जनवरी 2025 को किया जाएगा। पौष पूर्णिमा का दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और अनुष्ठान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

वहीं वर्ष 2024 में रविवार 15 दिसंबर को रात 8:49 बजे सूर्यदेव के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास का आरंभ हो चुका है और मंगलवार 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास का समापन होगा। खरमास में सूर्य को मलीन माना गया है, इस कारण खरमास में सभी शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ, कथा आदि धार्मिक अनुष्ठान आदि आयोजन किए जा सकते हैं।

पौष मास के शेष प्रमुख व्रत-त्यौहार

शुक्रवार 10 जनवरी 2025: पौष पुत्रदा एकादशी
शनिवार 11 जनवरी 2025: प्रदोष व्रत
सोमवार 13 जनवरी 2025: पौष पूर्णिमा

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