Thursday, July 16, 2026
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Diljit Dosanjh ने 1 रुपये में निभाया जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार

Diljit Dosanjh : पंजाबी सुपरस्टार और अभिनेता-गायक दिलजीत दोसांझ अपनी सादगी और संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिल्म ‘सतलुज’ के निर्देशक हनी त्रेहान ने खुलासा किया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित इस फिल्म में काम करने के लिए दिलजीत ने सिर्फ एक रुपये की सांकेतिक फीस ली।
निर्देशक के मुताबिक, दिलजीत का कहना था कि जसवंत सिंह खालड़ा जैसे महान व्यक्तित्व का किरदार निभाने के लिए पैसे लेना उनके लिए शर्म की बात होगी। यह खुलासा सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस और फिल्म प्रेमी दिलजीत की विनम्रता और उनके इस फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

निर्देशक हनी त्रेहान ने एक बातचीत में कहा कि यदि दिलजीत दोसांझ इस फिल्म का हिस्सा नहीं बनते, तो संभवतः ‘सतलुज’ बन ही नहीं पाती. उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही उनकी इच्छा थी कि जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका कोई ऐसा अभिनेता निभाए जो पंजाब की संस्कृति, समाज और उस दौर की संवेदनाओं को गहराई से समझता हो.

उनके मुताबिक, यदि किसी पारंपरिक बॉलीवुड अभिनेता को इस किरदार में लिया जाता तो चर्चा अभिनेता पर केंद्रित हो जाती, जबकि उनका उद्देश्य जसवंत सिंह खालड़ा की संघर्षपूर्ण यात्रा और उन हजारों पीड़ित परिवारों की कहानी को सामने लाना था, जिनकी पीड़ा इस फिल्म का मूल आधार है.

फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है. खालड़ा मूल रूप से एक बैंक कर्मचारी थे, लेकिन 1990 के दशक में उन्होंने पंजाब में वर्ष 1984 से 1994 के बीच कथित रूप से हुए हजारों गुप्त अंतिम संस्कारों की जांच कर मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उजागर किया.

न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 1995 में उनका कथित रूप से अपहरण कर पुलिस हिरासत में उनकी हत्या कर दी गई थी. उनकी कहानी को भारतीय मानवाधिकार आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जाता है.

हनी त्रेहान ने बताया कि वर्ष 2021 में उनकी दिलजीत दोसांझ से लगभग आधे घंटे की मुलाकात हुई थी. इस दौरान उन्होंने अपनी रिसर्च सामग्री और फिल्म की पटकथा दिलजीत को दिखाई. निर्देशक के अनुसार, जैसे ही दिलजीत ने जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर देखी और उनके संघर्ष के बारे में जाना, वह भावुक हो गए.

उन्होंने पटकथा को अपने माथे से लगाकर “वाहेगुरु” कहा और भावुक स्वर में कहा कि वह इतने महान व्यक्ति की भूमिका निभाने के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं ले सकते.

निर्देशक ने आगे बताया कि दिलजीत ने उनसे कहा, “मैं खालड़ा साहब जैसे इंसान का किरदार निभाने के लिए पैसे कैसे ले सकता हूं? ऐसा करना मेरे लिए शर्म की बात होगी.” हालांकि, जब निर्माता पक्ष ने अनुबंध संबंधी औपचारिकताओं का हवाला दिया, तब दिलजीत ने केवल एक रुपये की सांकेतिक फीस लेने पर सहमति जताई. निर्देशक का कहना है कि यह फैसला दिलजीत की अपने किरदार और विषय के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाता है.

हनी त्रेहान ने फिल्म की शूटिंग के दौरान दिलजीत के व्यवहार की भी खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने बताया कि कई बार तकनीकी और शूटिंग शेड्यूल में बदलाव के कारण दिलजीत को घंटों तक सेट पर इंतजार करना पड़ता था. कई मौकों पर वह सुबह छह बजे सेट पर पहुंच जाते थे, लेकिन उनका पहला शॉट शाम चार बजे के बाद लिया जा पाता था. निर्देशक ने स्वीकार किया कि इस स्थिति के लिए वह कई बार दिलजीत से माफी मांगते थे, लेकिन अभिनेता ने कभी कोई शिकायत नहीं की.

निर्देशक के अनुसार, हर बार दिलजीत उनसे यही कहते थे कि “पाजी, कोई बात नहीं. जो भी आप कर रहे हैं, फिल्म के लिए कर रहे हैं. मैं यहां फिल्म का साथ देने आया हूं.” हनी त्रेहान ने कहा कि दिलजीत का यह सहयोग, धैर्य और समर्पण पूरी टीम के लिए प्रेरणादायक रहा और उनके कारण फिल्म की शूटिंग कठिन परिस्थितियों में भी सुचारु रूप से पूरी हो सकी.

उल्लेखनीय है कि ‘सतलुज’ रिलीज से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से जुड़े विवादों में भी रही. इसके बाद फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर रिलीज किया गया, लेकिन रिलीज के लगभग 48 घंटे के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया. फिल्म को लेकर उठे विवादों के बावजूद निर्देशक का कहना है कि दिलजीत दोसांझ शुरू से अंत तक इस परियोजना के साथ मजबूती से खड़े रहे और उन्होंने हर स्तर पर फिल्म का समर्थन किया.

निर्देशक के इस खुलासे के बाद दिलजीत दोसांझ की संवेदनशीलता, सादगी और अपने किरदार के प्रति सम्मान की व्यापक चर्चा हो रही है. फिल्म जगत के जानकारों का मानना है कि व्यावसायिक दौर में किसी बड़े स्टार द्वारा केवल प्रतीकात्मक एक रुपये की फीस लेकर काम करना बेहद दुर्लभ उदाहरण है.

यही वजह है कि हनी त्रेहान का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दिलजीत दोसांझ की प्रशंसा लगातार बढ़ती जा रही है और प्रशंसक इसे एक कलाकार के अपने विषय और इतिहास के प्रति सम्मान का अनूठा उदाहरण बता रहे हैं.

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