Friday, July 10, 2026
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Electricity company की सख्त कार्रवाई, अवैध मीटर मामले में 3 कर्मचारियों पर केस दर्ज

Electricity company : जबलपुर. एमपी के जबलपुर शहर में बिजली कंपनी ने अपने ही तीन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए रांझी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इन कर्मचारियों पर बिना राशि जमा कराए अनाधिकृत रूप से बिजली मीटर लगाने का गंभीर आरोप है.

लगभग एक माह पूर्व विभाग ने अवैध तरीके से मीटर बदलने के मामले में दो बाहरी व्यक्तियों दिलीप कोष्ठा और कुतुबुद्दीन पर माढ़ोताल एवं अधारताल थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी. उस समय चेतावनी दी गई थी कि किसी भी कर्मचारी के लिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही होगी.

अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा के निर्देश पर हुई गहन जांच में रांझी जोन के तीन आउटसोर्स कर्मचारी राहुल पटेल, अमर लोधी और दीपक अहिरवार दोषी पाए गए, जिन्हें सेवा से बेदखल कर दिया गया है. 17 मीटर रीडरों का तबादला भी किया गया है.

बिजली चोरी अनियमितता पर एक्शन

जांच में यह खुलासा हुआ है कि संबंधित कर्मचारी विभाग की अनुमति के बिना और कनेक्शन शुल्क जमा करवाए बगैर ही कार्यालय से मीटर गायब कर उपभोक्ताओं के घरों में लगा रहे थे. इस गैर-कानूनी गतिविधि से कंपनी को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा था. पुख्ता सबूत मिलने के बाद विभाग ने इन तीनों आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित की है.

विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी के संसाधनों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह विभाग का अपना कर्मचारी ही क्यों न हो. यह सख्त रवैया भविष्य के लिए एक कड़ा संदेश है ताकि ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लग सके.

भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कसेगा शिकंजा

विभागीय कार्रवाई का सिलसिला यहीं नहीं थमने वाला है. मामले में लापरवाही और मिलीभगत के आरोप में एक लाईन कर्मचारी भगवान सिंह और कनिष्ठ अभियंता संजीत यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. अधीक्षण अभियंता ने संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान जो अन्य अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे घटनाक्रम में दोषी पाए जाएंगे, उन पर भी बहुत जल्द कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

विभाग ने अपने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में मीटर लगाने और बदलने की प्रक्रियाओं की लगातार बारीकी से जांच करते रहें. इस पूरी मुहिम का मुख्य उद्देश्य राजस्व नुकसान को रोकना और बिजली वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता को फिर से कायम करना है ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.

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