नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बावजूद भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिकी बाजार के लिए खोलने के पक्ष में नहीं है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार इन संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर अपनी पुरानी और संरक्षित नीति पर कायम रहेगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“जो रुख पहले था, वही आगे भी रहेगा। संवेदनशील उत्पादों के मामले में हमारा सामान्य और संरक्षित दृष्टिकोण जारी रहने की संभावना है।” इसका साफ मतलब है कि भारत बड़े पैमाने पर कृषि और डेयरी उत्पादों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं खोलेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला भारत की दीर्घकालिक व्यापार रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले भी भारत ने ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ताओं के दौरान अपने कृषि और डेयरी हितों की मजबूती से रक्षा की थी। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों से करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है और सस्ते विदेशी आयात से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर लगाया जाने वाला टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। फिलहाल, दोनों देशों के वार्ताकार इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेज़ों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि यह समझौता एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) होगा या फिर किसी व्यापक समझौते का केवल पहला चरण।











