Tuesday, September 22, 2026
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भारत-न्यूजीलैंड डील से निर्यातकों को फायदा, जीरो टैक्स के साथ युवाओं को वीजा में राहत

भारत और न्यूजीलैंड के व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर जुड़ गया है. दोनों देशों के बीच हुआ बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आगामी 20 अक्टूबर से आधिकारिक तौर पर प्रभावी हो जाएगा. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की.

दोनों देशों ने 27 अप्रैल को इस समझौते पर दस्तखत किए थे. इस ऐतिहासिक डील से द्विपक्षीय व्यापार, वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान में तेज उछाल आने के साथ-साथ न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर (लगभग 1.66 लाख करोड़) का भारी निवेश भी करेगा.

100% भारतीय उत्पादों पर जीरो ड्यूटी, श्रम-प्रधान सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार को पूरी तरह खोल दिया है। न्यूजीलैंड भारतीय निर्यात की सभी 100 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य सीमा शुल्क यानी जीरो ड्यूटी की सुविधा देगा। फिलहाल सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स समेत कई प्रमुख भारतीय उत्पादों पर वहां 10 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, जिसे 20 अक्टूबर से पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इससे भारत के कपड़ा एवं परिधान, चमड़ा और जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। निर्यात बढ़ने से इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

पीएम क्रिस्टोफर लक्सन बोले- चुनावी वादा पूरा हुआ, संसद ने दी मंजूरी

न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को भारी समर्थन के साथ 93 के मुकाबले मात्र 29 वोटों से इस कानून को मंजूरी दी थी, जिसमें सत्ताधारी नेशनल पार्टी और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी दोनों ने एकजुटता दिखाई. समझौते के लागू होने पर खुशी जताते हुए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने तीन साल पहले अपने पहले ही कार्यकाल में भारत से एफटीए करने का वादा किया था, जिसे उन्होंने पूरा कर दिखाया है. लक्सन ने कहा कि पहले लोग इसे असंभव मानते थे, लेकिन अब यह हकीकत बन चुका है. यह समझौता न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं का विशाल बाजार खोलेगा.

भारत ने डेयरी-कृषि को रखा सुरक्षित, संवेदनशील सामानों पर कोई ढील नहीं

भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने बेहद संतुलित रुख अपनाया है. भारत ने कुल 29.97 प्रतिशत संवेदनशील टैरिफ लाइनों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है, जिसमें डेयरी उत्पाद, चीनी, संवेदनशील कृषि उत्पाद और चुनिंदा धातुएं शामिल हैं. वहीं, भारत आने वाले कुल द्विपक्षीय व्यापार के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क कटौती लागू होगी. लकड़ी, कच्ची खाल, ऊन और भेड़ के मांस पर तुरंत शुल्क समाप्त होगा, जबकि वाइन, दवाएं, पॉलिमर और स्टील जैसे उत्पादों पर अगले 3 से 10 वर्षों में धीरे-धीरे टैक्स घटेगा. इसके अलावा मानुका शहद, सेब और कीवीफ्रूट के लिए टैरिफ-रेट कोटा तय किया गया है.

भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों के वीजा नियमों में भारी राहत

यह समझौता भारतीय छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में अवसरों का नया आसमान लेकर आया है. अस्थायी रोजगार वीजा व्यवस्था के तहत हर साल 5,000 कुशल भारतीयों को 3 साल तक काम करने का कोटा मिलेगा. इसमें आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा के अलावा आयुष चिकित्सक, योग शिक्षक और शेफ भी शामिल हैं. साथ ही वर्किंग हॉलिडे वीजा के तहत हर साल 1,000 युवा 12 महीने के लिए न्यूजीलैंड जा सकेंगे. वहां पढऩे वाले भारतीय छात्र अब पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे काम कर सकेंगे और पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें लंबी अवधि का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा भी दिया जाएगा.

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