सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की हैं। कोर्ट ने कहा कि मेनस्ट्रुएशन हेल्थ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लड़कियों का मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि क्लास 6 से 12 तक की सभी लड़कियों के लिए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में अलग-अलग जेंडर टॉयलेट्स हों, प्राइवेसी सुनिश्चित की जाए और दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों का ध्यान रखा जाए।
साथ ही, सभी स्कूलों के टॉयलेट्स में मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएं। ये वेंडिंग मशीनों या तय कर्मचारियों के माध्यम से दिए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि मेनस्ट्रुएशन पीरियड के दौरान जरूरी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। कोर्ट ने तीन महीने के अंदर सभी स्कूलों से कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी है।











