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यादों में किसकी भीगे रैना- अनुराधा चौहान

आई रजनी सुन सजनी क्या सोचे चुप होके मेघा छाए घिर-घिर आए तड़ित चमके शोर मचाए पुरवा झूमे चले लहराए मदहोश बड़ा यह सुंदर शमा झूम उठा है सारा...

होंठों पर मुस्कान लिए- अनुराधा चौहान

ख्व़ाहिशों के झरोखों से झाँकती उम्मीद भरी आँखें वक़्त की धूप में मुरझाया चेहरा फ़िर भी होंठों पर मुस्कान लिए कर्मशील व्यक्तित्व के साथ सबकी खुशियों में अपने सपने...

रिश्तों के मायने- अनुराधा चौहान

भीड़ कितनी भी हो मगर पर तन्हाईयां रास आतीं हैं होती है कुछ वेदना भरी स्मृतियां मन मस्तिष्क से नहीं निकल पातीं हैं ऐसे ही जब कोई अपना असमय ही...

यादों की परछाइयां- अनुराधा चौहान

कुछ लम्हे दिल में बस जाते तो मिटाएं नहीं मिटते यादों में उनके चित्र सदा ज़िंदा ही हैं रहते बचपन से लेकर जवानी कुछ यादें नई पुरानी कुछ धुंधले होते...

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