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सुबह- श्रीधर प्रसाद द्विवेदी

फागुन मास लगा जब से तबसे कुछ और बयार बही है। दक्षिण से मलयानिल आकर कान सनेहिल प्यार कही है। आश जगी अनुराग जगा रमणी निज राग सम्हार रही...

चलो सखि बसंत आया- डॉ अनिल कुमार उपाध्याय

चलो सखि बसंत आया कोकिल कुहुकने लगी मधुवन भी सरसाया भौरों का गुंजार गीत कुसुमों को मनभाया पतझड़ परिवर्तन का नया एक संदेसा लाया नव-किसलय की अंगड़ाई ने...

भारत सब देशों से न्यारा- स्नेहलता नीर

भारत सब देशों से न्यारा जन गण मन का है अति प्यारा जाति धर्म हैं भिन्न हमारे फिर भी मिलकर रहते सारे कर्मवीर हम हैं रखवारे सबका सबसे भाईचारा भारत...

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