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प्रतीक्षा के घावों पर: स्नेहलता नीर

पिया गए परदेश न लौटे, अब तक मन अकुलाए। चिंतन में पीड़ा के बादल, लौट-पौट गहराए विरह-ज्वाल सुलगाती साजन, रूठी निंदिया रानी। तारे गिनती रात बिताती, मेरी...

तेरी याद बहुत है आई: कालीचरण नाग

दूर तुम भी, दूर में भी, ये कैसी घड़ी है आई। आज कल मेरे यारा, तेरी याद बहुत है आई।। कुछ दिन गए है बीत, कुछ...

आइनों के राजमहल में: मुकेश चौरसिया

कितना कुछ करने को था, कितना सा कर पाये हम कुछ उधार की साँसे पाकर, जीवन भर इतराए हम आइनों के राजमहल में, कल तक अपना...

साथी तुम आवाज़ न दो: रूची शाही

सौ आँसू रखकर आँखों मेंतोड़ गए तुम नेह के बंधनदीद को तेरे तड़प तड़प केबरस रहा आँखों से सावनजो होना...

संभालकर रखा है अश्क़: रवि प्रकाश

टूटे हुए शीशे में तस्वीर सजाई नहीं जाती टुकड़े हुए दिल में मुहब्बत बसाई नहीं जाती कहकर अपना फिर कैसे गैर सा काम करें नसीहतें कुछ भली...

चाहत है दिल में: रामसेवक वर्मा

रूठे सजन को, मनाऊं मैं कैसे चाहत है दिल में, दिखाऊं मैं कैसे मिले चाहे दुनिया में, कितने हमें ग़म नहीं जी सकेंगे, तुम्हारे बिना हम जमाने को...

बस इतना प्यार था मेरा: अर्चना श्रीवास्तव

न लौट आया तू कभी, न इन्तजार कम हुआ न तेरा प्यार कम रहा, न मेरा प्यार कम हुआ ये भावों की थीं शोखियाँ, जो समर्पित हो गयीं जी चाहा...

तुम्हारी आँखों में: मुकेश चौरसिया

राह के पत्थर सभी अपनी ठोकर में थे हमसफ़र बन साथ जब तुम सफ़र में थे सारे हँसी नजारे तुम्हारी नजर में थे, इन सबसे बेखबर तुम...

बारिश: आलोक कौशिक

कल रात जब वो आई थी घर मेरे तब होने लगी थी बेमौसम बारिश सिर्फ़ संयोग था बादलों का बरसना या थी कुदरत की वह एक साज़िश मिली...

बादल प्रेम सुधा बरसाने आया है- आलोक कौशिक

पिपासा तृप्त करने प्यासी धरा की बादल प्रेम सुधा बरसाने आया है अब तुम भी आ जाओ मेरे जीवन प्रेमाग्नि जलाने सावन आया है देखकर भू की मनोहर...

चाँदनी रात- अतुल पाठक

चाँदनी रात हो चाँद का साथ हो दिल की धड़कन में बस इक तेरा नाम हो मुझे इंतिज़ार है तेरा बस इक मुलाकात हो तेरे दीदार की...

तुम्हारी आँखें- जसवीर त्यागी

तुम्हारी सुंदर आँखें सिर्फ़ आँखें नहीं हैं वे घर भी हैं किसी प्यार करने वाला का तुम्हारी आँखों के आशियाने तले आकर मैं दुनिया के सारे दुःख-दर्द भूल जाता हूँ जब वे प्यार...

कितना आसान है- जॉनी अहमद

कितना आसान है दुनिया में दिखावा करना किसी की ख़ुदकुशी पे कोई भी दावा करना जब तलक़ ज़िन्दा थे न था कोई रिश्ता उनसे सबको यहाँ आता...

आंखें खुली हैं वक़्त की- पुष्पेन्द्र सिंह

वो चल रहा था बस यूं ही अपने हिसाब से आंखें खुली हैं वक़्त की मेरे ज़वाब से जितना यह मेरी ज़िंदगी मुझको सिखा गई उतना अभी...

तू मुझे दीवाना कर दे- मनोज शाह

तु मुझे दीवाना कर दे, या फिर कर दे पागल आसपास बरसता रहूं, तेरे बनके मैं बादल उस समंदर का वासी हूं मैं, जिस नैनों में छलके काजल लाज की...

करना न मोहब्बत कभी- आलोक कौशिक

हुई भूल जो समझा उन्हें शाइस्ता जाती है अब जान आहिस्ता-आहिस्ता करना न मोहब्बत कभी बेक़दरों से ऐ दिलवालों तुम्हें वफ़ा का है वास्ता मंज़िल तो मिलती नहीं...

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