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आदमी का भरोसा नहीं: रकमिश सुल्तानपुरी

तुमने क़िरदार कोई भी परखा नहीं आजकल आदमी का भरोसा नहीं ख़्वाब कैसे बुने दायरों से अलग, जब किसी का यहां ख़्वाब पूरा नहीं जो मेरे दिल में...

शनाया

मिलिए खूबसूरत और आत्मविश्वास से भरपूर "शनाया" से तुम सबकी जिससे नजर नहीं हट रहीदेशी घी की सोंधी ख़ुशबू और गुड़ के रवों मेंकरीने से...

मिल सका ना फिर हमें: रवि प्रकाश

मिल सका ना फिर हमें वो दीदार देखिए आज भी है आपका इंतजार देखिए रूठना तो ठीक है मुकरना सही न था अब न होगा फिर कभी...

ऐ मानुष: ममता शर्मा

ऐ मानुष! मनुष्य का तन पाकर तू इस जहां में आया तूने तो खोया और क्या पाया भूल गया तू कर्तव्य अपने मनुष्य होने का और दौड़ रहा हैं एक ऐसी...

दीपावली के शुभ अवसर पर: पूजा

अपने घर पर मैंने, दीपावली के शुभ अवसर पर, माँ लक्ष्मी एवं सरस्वती की तस्वीर के सामने, मैंने प्रार्थना की दोनों हाथ जोड़कर हे माँ सरस्वती, मेरी सोई हुई...

एक दुःखान्त कविता: स्नेहा किरण

मैं जब कभी काजल लगाती हूँ आप से आप मेरी पलके भीग जाती है पूरा मेकअप खराब हो जाता है फिर से टच अप करना पड़ता उफ्फ सारा ज्ञान...

स्वयं परिपालन: राजन कुमार

तू अपनी खूबियां ढूंढ, कमियां निकालने के लिए, लोग हैं न... अगर रखना है कदम तो आगे रख, पीछे खींचने के लिए लोग हैं न... सपने देखने ही है तो ऊंचे देख, नीचा दिखाने...

यही सोचती हूँ: गरिमा गौतम

आप क्या हो ये बतलाना चाहती हूँ आपको सादर चरण नमन करती हूँ आप मेरे जीवन की प्रेरणा, विश्वास हो मेरे जीवन के, सच में आप 'सर'...

उसकी खैरियत: संजय अश्क़

लबों पर तेरा नाम हो या ना हो मग़र, दिल की धड़कनें तेरे नाम से चलती है। जब भी उदास हो जाता हूं जीवन में, मन में...

धड़कन के स्वर: स्नेहलता नीर

सुख का छोर छीनकर मुझको, पीड़ाओं का छोर दिया। निठुर नियति ने शांत चित्त को, उथल-पुथल घनघोर दिया। जीवन के उपवन में पतझर, नयन श्याम घन...

श्री राम: सोनल ओमर

पूर्ण हुआ स्वप्न वह, उर में जो था संचित। आयी वो बेला जिससे, वर्षो से थे वंचित।। रामराज्य की प्रतीक्षा, शीघ्र ही होगी समाप्त। होंगी अपार खुशियाँ, चहुँओर में व्याप्त।। जप ले...

शुभ दीपावली: जयलाल कलेत

दीपों का त्यौहार दिवाली, घर आंगन में सजी रंगोली। मिलने को आए हमजोली, खुशियों से भर गई है झोली। रामचन्द्र लौट आए अयोध्या, भाई लक्ष्मण, साथ में सिया। आज दीपों...

आओ मिलकर सब दीवाली मनायें: पूजा

दिव्य गुणों को अपनाकर। जीवन का आंगन सजायें।। ना अब कोई दुख हो, ना हो गम का अंधेरा। लगे रात भी, जैसे उज्जवल सवेरा संगम युग में आत्म...

दीपोत्सव संदेश: गौरीशंकर वैश्य

वनवासी प्रभु राम सिय, बिता चतुर्दश वर्ष। घर लौटे साकेत जब, दीपक जले सहर्ष। अंधकार पर जीत हित, जलते दीप सगर्व। देता जय संदेश शुभ, दीपावलि का पर्व। तमसो मा ज्योतिर्गमय, सारस्वत युग-धर्म। सद्प्रवत्तियों...

फिर मनाएंगे दीवाली: अतुल पाठक

पापा जल्दी ठीक हो जाओ, फिर मनाएंगे दीवाली। घर को जल्दी तुम लौट आओ, फिर मनाएंगे दीवाली। तुम बिन घर सारा सूना है, जैसे हो सब वीराना है। हँसी मुस्कुराहट...

भीगी पलकें: पिंकी दुबे

भीगी पलकें अब सूख गई हैं कह रही वह फिर भी मूक होकर जो गुजरी है इन पर, जेहन से भी वो अब ओझल हो गया है लब मानो सिल गये...

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