जबलपुर। एमपी के जबलपुर में नर्मदा विकास विभाग के तहत कुण्ड वितरण नहर एवं इसके वितरण नहर प्रणाली का निर्माण कार्य की निविदा लेने वाले ठेकेदार और बैंक अधिकारी ने मिलकर विभाग को 82 लाख रूपए की चपत लगा दी है। दोनों ने सांठगांठ करके बैंक में रखी एफडीआर चोरी-छिपे भुना ली। मामले की जानकारी मिलते एफआईआर की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 02 के कार्यपालन यंत्री वीनेन्द्र कुमार भालाधरे ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमे लेख है कि नर्मदा विकास अंतर्गत कुण्ड वितरण नहर एवं इसके वितरण नहर प्रणाली का निर्माण कार्य निविदा स्वीकृति 21 अक्टूबर 2004 के माध्यम से ठेकेदार मेसर्स कर्नाटका लेण्ड आर्मी बैंगलोर को दिया गया था।
परंतु ठेकेदार द्वारा उक्त कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण नहीं किये जाने के कारण विभाग द्वारा विभाग एवं ठेकेदार के मध्य हुये अनुबंध को निरस्त किया गया। अनुबंध निरस्त किये जाने के विरोध में ठेकेदार द्वारा माननीय माध्यस्थम अभिकरण में अपील की गई। माननीय मध्यस्थ अभिकरण द्वारा पारित अधिनिर्णय दिनांक 07.09.2022 के आदेशानुसार ठेकेदार की जमा दो नग बैंक गारंटी 43,75000 रुपए एवं 4375000.के रूप में यूनियन बैंक सिविक सेंटर मढ़ाताल से बैंक ड्राफ्ट बनाकर राजसात की गई।
तत्पश्चात् ठेकेदार की जमा मूल एफडीआर दो नग के नगदीकरण हेतु शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक मढ़ाताल को पत्र लिखा गया। यूनियन बैंक शाखा प्रबंधक द्वारा अपने पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि तकनीकी खराबी एवं पुरानी एफडीआर होने के कारण एकाउन्ट नंबर नहीं मिल रहा है जिसके कारण एफण्डीआर का नगदीकरण नहीं हो पा रहा है। एफडी आर का नगदीकरण किये जाने हेतु पुन: शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक मढ़ाताल सिविक सेंटर को पत्र लिखा गया।
शाखा प्रबंधक द्वारा अपने पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि उक्त एफडी आर का नगदीकरण वर्ष 2015 में हो चुका हैं। ठेकेदार के खाते में एफडीआर की राशियां अंतरित कर दी गई है। शाखा यूनियन बैंक द्वारा इस तरह अवैधानिक रूप से नियम विरूद्ध कृत्य किये जाने पर इस कार्यालय द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया कि मूल एफडीआर इस कार्यालय में जमा है फिर किस आधार पर एफडीआर की राशि ठेकेदार के खाते में अंतरित कर दी गई।
पुलिस ने जांच उपरांत पाया गया कि शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक मढ़ाताल सिविक सेंटर द्वारा कूटरचित ढंग से ठेकेदार को एफडीआर राशि का भुगतान करते हुये शासन को बहुत बड़ी हानि पहुंचाई गई है।
जांच पर प्रथम दृष्ट्या प्रोजेक्ट मैनेंजर के व्ही मलैश मेसर्स कर्नाटक लेण्ड आर्मी बैंगलोर वर्तमान कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेव्हलेपमेंट लिमिटेड बैंगलोर द्वारा तत्कालीन बैंक अधिकारी कार्पोरेशन बैंक शाखा जबलपुर वर्तमान यूनियन बैंक शाखा मढाताल सिविक सेन्टर जबलपुर मय बिलय के साथ मिलकर नर्मदा विकास विभाग के बिना जानकारी के ठेकेदार के व्ही मलैश द्वारा दो नग एफ डी आर जिसकी राशि क्रमश 4483866, 3757048 रूपये की राशि नियम विरूद्ध नगदीकरण कर शासन एवं विभाग को कुल 8240914 रूपये की क्षति पहुंचाते हुये धोखाधड़ी कर अमानत में खयानत करना पाया गया।











