डिंडौरी जिले में लंबित निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार पर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में देर रात तक चली समीक्षा बैठक के बाद तय समय-सीमा में काम पूरा न करने पर 35 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
बैठक सोमवार रात करीब 9:30 बजे तक चली, जिसमें प्रभारी जिला पंचायत सीईओ पंकज जैन सहित सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, एसडीओ, इंजीनियर और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं के निर्माण कार्यों की बिंदुवार जांच की गई।
सामने आया कि कई परियोजनाएं वर्षों पहले स्वीकृत होने के बावजूद अब तक अधूरी पड़ी हैं। कलेक्टर ने मनरेगा के पुराने कार्यों, 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत निर्माण, आरईएस विभाग के प्रोजेक्ट, विधायक निधि के कार्य, वाटरशेड योजनाएं, आंगनबाड़ी भवन, अटल सुशासन भवन, जल गंगा संवर्धन अभियान, ग्रेबियन संरचनाएं और पेयजल संबंधी निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई।
कलेक्टर भदौरिया ने कहा कि कार्यों में देरी को गंभीर लापरवाही माना जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी। समीक्षा में यह भी पाया गया कि पंचायत स्तर से लेकर इंजीनियर, एसडीओ और जनपद सीईओ तक अपेक्षित निगरानी और रुचि नहीं ले रहे हैं। कुछ मामलों में भूमि विवाद को कारण बताया गया, जिस पर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ऐसे विवादों का प्राथमिकता से निराकरण कर निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराए जाएं।











