मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनी की नोडल कंपनी भी है, यानि विद्युत वितरण कंपनियों में कर्मचारी हित के किसी भी निर्णय को लागू करने के लिए पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन एवं प्रशासन विभाग की स्वीकृति आवश्यक है, किन्तु अभी तक का अनुभव कह रहा है कि पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन एवं प्रशासन विभाग ने कर्मचारियों के हित में विद्युत वितरण कंपनी प्रबंधन द्वारा लागू किए गए अनेक आदेशों एवं निर्देशों पर रोक लगा दी है।
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि संविदा कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिये जाने, नियमित कर्मचारियों का जोखिम भत्ता बढ़ाये जाने तथा सभी संवर्ग के लाइन कर्मियों को प्रदान किए जाने वाले जोखिम भत्ते की राशि में एकरूपता लाये जाने के लिए उन्होंने ऊर्जा विभाग एवं बिजली कंपनियों के प्रबंधन को पत्र लिखा था।
जिस पर पावर मैनेजमेंट कंपनी ने पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से अभिमत/सुझाव मांगा था। अपने प्रत्युत्तर में पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मानव संसाधन एवं प्रशासन विभाग ने लिखा कि प्रांतीय महासचिव, मप्र विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ द्वारा विद्युत कंपनियों में कार्यरत आउटसोर्स, संविदा तथा नियमित कर्मियों द्वारा किये जा रहे जोखिमपूर्ण कार्य हेतु प्रदान किये जा रहे जोखिम भत्ता में एकरूपता लाये जाने, तीनों वर्ग के कर्मचारियों को एक जैसा जोखिम भत्ता दिये जाने के संबंध में लेख किया गया था। तत्संबंध में आपके कार्यालय के संदर्भित पत्र के माध्यम से प्रकरण के संबंध में अभिमत/सुझाव से अवगत कराने हेतु लेख किया गया है।
अवगत होवे कि संघ की मांग अनुसार विद्युत कंपनियों में कार्यरत आउटसोर्स, संविदा तथा नियमित कर्मियों द्वारा किये जा रहे जोखिमपूर्ण कार्य हेतु प्रदान किये जा रहे जोखिम भत्ता में एकरूपता लाये जाने, तीनों वर्ग के कर्मचारियों को एक जैसा जोखिम भत्ता दिये जाने के संबंध में पूर्व क्षेत्र कंपनी सहमत है। अतः उक्त प्रकरण पर उचित कार्यवाही हेतु अथवा मानव संसाधन प्रमुखों की आगामी बैठक में चर्चा हेतु प्रस्तुत किये जाने का अनुरोध है।
हरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि लाइन कर्मियों द्वारा किए जाने वाले करंट के कार्य की जोखिमपूर्ण प्रकृति को देखते हुए सभी संवर्ग के लाइन कर्मियों को एक समान जोखिम भत्ता दिया जाना चाहिए, साथ ही सभी बिजली कंपनियों को कर्मचारी हित के इस निर्णय को सर्वसम्मति से यथाशीघ्र लागू किया जाना चाहिए। इस तरह के निर्णयों पर किसी तरह की रोक लगाना अन्यायपूर्ण होगा।












