विश्व में क्लाइमेट बहुत ही तेजी से बदल रहा हैं, कहीं सूखा, कही गर्मी, कहीं बाढ़ की स्थिति निर्मित हो रही है। क्लाइमेट में बदलाव संतुलित करने के लिए ऊर्जा संरक्षण जरूरी हैं। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हैं। एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के प्रमुख व आईआईटी मुंबई के प्रो. चेतन सिंह सोलंकी ने यह बात पोलोग्राउंड इंदौर स्थित पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मुख्यालय में कही। वे ऊर्जा संरक्षण कार्यक्रम के तहत मंगलवार की शाम यहां कार्मिकों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पूरे ब्रह्मांड में अभी सामान्य स्तर से 52 प्रतिशत ज्यादा कार्बन डायआक्साइड की मौजूदगी हैं। यह विषाक्त स्थिति बना रही हैं। हम जो कार्बन उत्सर्जन करते हैं, उसकी मौजूदगी अगले 300 वर्ष तक होती है, इसी से कार्बन डायआक्साइड से खतरे की गंभीरता मापी जा सकती है।
प्रो. सोलंकी ने कहा कि अभी पृथ्वी का औसत तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस से 1.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया हैं, समुद्र के किनारे की बस्तियां डूबने लगी हैं। बर्फ पिघल रही हैं। ऐसे में क्लाइमेट में सुधार के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा, अभी क्लाइमेट सुधार के लिए हमारे पास करीब साढ़े चार वर्ष का ही समय बचा हैं, इस अवधि में व्यापक बदलाव नहीं लाया गया तो मानव जीवन बहुत ही कठिन स्थिति में पहुंच जाएगा।
उन्होंने इंदौर, मध्यप्रदेश, भारत एवं विश्व के आंकड़े प्रस्तुत कर क्लाइमेट में सुधार के लिए प्रत्येक व्यक्ति के माध्यम से समर्पित भावना के साथ कार्य करने एवं आवश्यकताएं संतुलित करने, त्याग की भावना के विकास इत्यादि पर विचार रखें। उन्होंने बिजली कंपनी के सैकड़ों कार्मिकों को ऊर्जा संरक्षण का संकल्प भी दिलाया।
पोलोग्राउंड पहुंचने पर प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का स्वागत मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान, संयुक्त सचिव संजय मालवीय ने किया। प्रो. सोलंकी ने बिजली मुख्यालय में हुए आयोजन के लिए प्रबंध निदेशक सुश्री रजनी सिंह के प्रति आभार भी जताया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती स्वाति वाजपेयी ने और श्रीमती रीना चौधरी ने आभार व्यक्त किया।











