Sunday, January 25, 2026
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MP के सिवनी जंगल से राजस्थान के लिए बाघिन का रोमांचक स्थानांतरण अभियान शुरू

सिवनी,(हि.स.)। मध्य प्रदेश के विश्वविख्यात पेंच टाइगर रिजर्व से राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण अभियान में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। राजस्थान भेजी जाने वाली बाघिन को विशेषज्ञ टीमों ने सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहनाया है।

दरअसल, पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश कुमार सिंह ने हिस को बताया कि “पेंच से पूर्व में भी कई बार बाघ, बाघिन और चीतल को मध्यप्रदेश के विभिन्न अभ्यारण्यों जैसे पन्ना, नौरादेही, कान्हा और सतपुड़ा में स्थानांतरित किया जाता रहा है। हालांकि, यह पहला अवसर है जब पेंच से किसी अन्य राज्य, विशेषकर राजस्थान, के लिए बाघिन भेजी जा रही है, जिसे पेंच के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा सकता है।”

16 साल बाद फिर एयरलिफ्ट ट्रांसलोकेशन की तैयारी

जानकारी के अनुसार, देश में पहली बार वर्ष 2009 में कान्हा टाइगर रिजर्व से पन्ना टाइगर रिजर्व को बाघिन को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर भेजा गया था। लगभग 16 वर्ष बाद, एक बार फिर मध्यप्रदेश से हेलिकॉप्टर द्वारा बाघिन स्थानांतरण की तैयारी की जा रही है। पेंच की बाघिन को विशेष हेलिकॉप्टर के माध्यम से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, जो राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व है, पहुंचाया जाएगा।

रेडियो कॉलर के बाद अब 24×7 निगरानी

बाघिन को रेडियो कॉलर लगाए जाने के बाद अब अगले कुछ दिनों तक उसके स्वास्थ्य, मूवमेंट,व्यवहार पर तकनीकी टीमों द्वारा लगातार निगरानी रखी जाएगी। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही अगले चरण की अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।

गाैरतलब है कि अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण का यह पूरा अभियान उच्च स्तरीय वैज्ञानिक सतर्कता, तकनीकी विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश व राजस्थान के वन विभागों के बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह प्रयास दोनों राज्यों में बाघ संरक्षण, जीन-पूल सुधार और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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