Thursday, May 21, 2026
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Health services : मध्य प्रदेश में लगातार मजबूत हो रही स्वास्थ्य सेवाएं

Health services : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त एवं उन्नत बनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही उनकी सतत एवं सशक्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है।

Health services : Strong operation of neonatal intensive care units

राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे एवं जन्म के समय गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयाँ (एसएनसीयू) प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों से नवजात शिशुओं को विशेषज्ञ उपचार, आधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं प्रशिक्षित चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराई जा रही है।

Health services
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Health services : Significant increase in treatment and discharge rates

वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 25-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुँच गई है।

साथ ही नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर भी अब तक के सर्वोत्तम स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुँच गई है। राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू में इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। एसएनसीयू में 85.2 प्रतिशत डिस्चार्ज दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है।

इसके साथ ही लामा दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 8.29 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। यह उपलब्धि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी उपचार प्रबंधन को दर्शाती है।

Health services :  Treatment capacity increased due to increase in number of beds
राज्य शासन द्वारा नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ कुल 1654 बिस्तर उपलब्ध थे, वह अब बढ़कर 1770 हो गए हैं। इससे अधिक संख्या में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
Health services :  Availability of modern equipment and specialist treatment

राज्य सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये अत्याधुनिक एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की एसएनसीयू इकाइयों में जटिल एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये वेंटिलेटर, सी-पैप, निर्बाध ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

Health services
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साथ ही, फैसिलिटी बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एफबीएनसी) में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती नवजात शिशुओं को आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, सी-पैप, फोटोथेरेपी एवं ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एंटीबायोटिक के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

साथ ही सर्फ़ैक्टेंट एवं कैफीन साइट्रेट जैसी आधुनिक औषधियों के उपयोग से समय पूर्व जन्मे गंभीर नवजात शिशुओं का उपचार कर जीवन संरक्षित किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती लगभग 8 प्रतिशत नवजात शिशुओं को वेंटिलेटर सपोर्ट, 37 प्रतिशत को फोटोथेरेपी, 49 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक ऑक्सीजन तथा 47 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक एंटीबायोटिक उपचार प्रदान किया गया।

Health services : Strengthened neonatal care services at the sub-district level through NBSU

राज्य में संचालित 200 एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) के माध्यम से भी नवजात शिशुओं को प्रभावी उपचार एवं स्थिरीकरण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक 2 हजार 241 नवजात शिशुओं को उपचार कर सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया है।

एनबीएसयू इकाइयों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं को स्थिरीकरण सेवाओं के साथ-साथ ऑक्सीजन सपोर्ट एवं फोटोथेरेपी जैसी आवश्यक उपचार सुविधाएं उप जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को प्रारंभिक स्तर पर ही समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है, जिससे उनकी जीवन रक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं।

MNCU: Innovative initiative of “Zero Separation” concept

माँ एवं नवजात शिशु को एक साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में एमएनसीयू (मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) की अवधारणा को भी विस्तार दिया जा रहा है। यह व्यवस्था “जीरो सेपरेशन” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें माँ और नवजात शिशु को अलग नहीं किया जाता। इससे स्तनपान, कंगारू मदर केयर तथा नवजात की समुचित देखभाल को बढ़ावा मिलता है। यह पहल विशेष रूप से कम वजन एवं समय पूर्व जन्मे शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है।

Health services
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23 MNCUs are operating in the state

प्रदेश में वर्तमान में 23 एमएनसीयू प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से माताओं एवं नवजात शिशुओं को संवेदनशील, सुरक्षित एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।

Life-saving nutrition for newborns from Mother Lactation Units (CLMCs)

प्रदेश सरकार नवजात शिशु को समय पर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयास कर रही है। कम वजन एवं बीमार नवजात शिशुओं को बेहतर पोषण एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए मातृ दुग्ध इकाई से नवजातों को जीवनदायी पोषण दिया जा रहा है।

वर्ष 2025-26 में इंदौर एवं भोपाल स्थित 2 क्रियाशील सीएलएमसी (कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर) इकाइयों के माध्यम से 1,031 स्वैच्छिक माताओं द्वारा 241.6 लीटर मातृ दुग्ध दान किया गया। दान किए गए इस मातृ दुग्ध को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से पाश्चुरीकृत कर 1,159 कमज़ोर एवं बीमार भर्ती नवजात शिशुओं को कुल 282.11 लीटर सुरक्षित दाता मातृ दुग्ध (डोनर ह्यूमन मिल्क) उपलब्ध कराया गया।

यह पहल उन नवजात शिशुओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, जिन्हें जन्म के तुरंत बाद पर्याप्त मातृ दुग्ध उपलब्ध नहीं हो पाता। कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर की यह व्यवस्था नवजात शिशुओं को संक्रमण से सुरक्षा, बेहतर पोषण एवं स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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