Thursday, February 12, 2026
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पत्नी को जलाने का मामला, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने दहेज हत्या से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रकरणों में आरोपी को सजा देने के लिए क्रूरता व्यवहारद्ध का ठोस रूप से साबित होना आवश्यक है। यदि अभियोजन पक्ष के गवाह क्रूरता सिद्ध करने में असफल रहते हैं तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

यह मामला डिंडोरी जिले से जुड़ा है जहां जिला अदालत ने पत्नी की मौत के मामले में पति को दोषमुक्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। प्रकरण के अनुसार सुनीता और रणजीत सिंह ने जून 2020 में प्रेम विवाह किया था। शादी के लगभग एक साल के भीतर अप्रैल 2021 में पति से कथित विवाद के बाद सुनीता ने खुद को आग लगा ली।

गंभीर रूप से झुलसी सुनीता की अगले दिन इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने पति रणजीत सिंह को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। डिंडोरी जिला अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में रणजीत सिंह को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद राज्य शासन ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने की।

हाईकोर्ट ने राज्य शासन की अपील को खारिज करते हुए जिला अदालत के दोषमुक्ति के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की गवाह मृतिका की बहन ने स्वीकार किया कि यह प्रेम विवाह था और आरोपी पति द्वारा कभी दहेज की मांग नहीं की गई।

साथ ही रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं पाया गया जिससे दहेज के लिए क्रूरता साबित हो सके। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी को सजा देने के लिए आवश्यक कानूनी तत्व पूरे नहीं होते इसलिए दोषमुक्ति में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

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