जबलपुर. मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के वर्ष 2026 से 2031 के लिए हुए चुनाव में जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष तिवारी ने लगातार दूसरी बार परिषद में स्थान हासिल किया है. प्रदेशभर से मिले अधिवक्ताओं के समर्थन के बीच उन्होंने 10वें क्रम पर जीत दर्ज की. लगातार दूसरी बार निर्वाचन ने उन्हें परिषद में निरंतरता के साथ काम करने का अवसर दिया है. चुनाव परिणाम सामने आने के बाद जबलपुर के विधिक क्षेत्र में उनके निर्वाचन को लेकर अधिवक्ताओं के बीच चर्चा रही.
तीन दशक की वकालत का मिला अनुभव
मनीष तिवारी का विधिक सफर करीब तीन दशक पुराना है. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबे समय से वकालत करते हुए उन्होंने न्यायिक और बार से जुड़े विभिन्न विषयों पर काम किया है. उनके व्यावसायिक जीवन की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोचन सिंह रूपराह के जूनियर के रूप में हुई. वरिष्ठ अधिवक्ता के मार्गदर्शन में प्रारंभिक दौर में मिली प्रशिक्षण की यह पृष्ठभूमि आगे चलकर उनके विधिक कार्य का आधार बनी.
उनका संबंध अधिवक्ता परिवार से भी रहा है. वे स्वर्गीय अधिवक्ता प्रेम शंकर तिवारी के पुत्र हैं. लंबे समय तक उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने के साथ उन्होंने अधिवक्ताओं से जुड़े संगठनात्मक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई.
बार संगठनों में निभाईं कई जिम्मेदारियां
राज्य अधिवक्ता परिषद के अलावा मनीष तिवारी जिला अधिवक्ता संघ जबलपुर और उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन में भी विभिन्न दायित्व संभाल चुके हैं. बार संगठनों में काम करने के दौरान अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों, संगठनात्मक गतिविधियों और व्यावसायिक हितों से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रियता रही.
उनके समर्थकों का कहना है कि विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव परिषद के कामकाज को समझने में उपयोगी रहा है. यही अनुभव उनके लगातार दूसरी बार चुनाव मैदान में आने के दौरान भी चर्चा में रहा.
युवा अधिवक्ताओं के मुद्दे भी रहे केंद्र में
वकालत के बदलते स्वरूप के बीच युवा अधिवक्ताओं के सामने व्यावसायिक चुनौतियां लगातार बढ़ी हैं. ऐसे में बार संगठनों के सामने नए अधिवक्ताओं के मार्गदर्शन, उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और विधिक पेशे से जुड़े कल्याणकारी विषयों को उठाने की चुनौती रहती है.
मनीष तिवारी की संगठनात्मक सक्रियता में युवा अधिवक्ताओं से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण रहे हैं. परिषद में उनका दूसरा कार्यकाल ऐसे समय शुरू होगा, जब नई पीढ़ी के अधिवक्ता तकनीक, बदलती न्यायिक प्रक्रिया और पेशेवर प्रतिस्पर्धा के बीच अपने लिए बेहतर स्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
जबलपुर को मिला प्रतिनिधित्व का लगातार अवसर
राज्य अधिवक्ता परिषद में जबलपुर से प्रतिनिधित्व का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि शहर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ का प्रमुख केंद्र है. यहां बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से जुड़े हैं और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले मामलों की पैरवी करते हैं.
मनीष तिवारी के लगातार दूसरे निर्वाचन से जबलपुर के अधिवक्ताओं को परिषद के स्तर पर अपने मुद्दों और अपेक्षाओं को सामने रखने के लिए निरंतर प्रतिनिधित्व मिलेगा. चुनाव परिणाम के बाद स्थानीय अधिवक्ताओं और उनके सहयोगियों ने उन्हें बधाई दी तथा आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं.
नई जिम्मेदारी के साथ बढ़ी अपेक्षाएं
लगातार दूसरी जीत के बाद अब मनीष तिवारी के सामने परिषद के आगामी पांच वर्षीय कार्यकाल में अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रभावी भूमिका निभाने की जिम्मेदारी होगी. विशेष रूप से बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय, अधिवक्ता कल्याण, युवक








