Saturday, April 25, 2026
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कानपुर लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन: 90 घंटे बाद शिवम मिश्रा गिरफ्तार

पुलिस ने छह बंगलिया रोड से पकड़ा, कोर्ट में पेशी; 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग. कानपुर में तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से छह लोगों को टक्कर मारने के मामले में आरोपी शिवम मिश्रा को आखिरकार 90 घंटे बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में गठित स्पेशल टीम ने उसे छह बंगलिया रोड स्थित उसके घर के पास से पकड़ा। ग्वालटोली थाना पुलिस आरोपी को कोर्ट में पेश करने के लिए ले गई, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की गई है।

सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद से शिवम कानपुर में ही मौजूद था। मामले में लगी धाराएं सात साल से कम सजा वाली थीं, इसलिए शुरुआत में पुलिस ने गिरफ्तारी के बजाय नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया अपनाई। लेकिन 35-बीएस के नियमों का पालन न होने पर पुलिस ने गिरफ्तारी का अधिकार इस्तेमाल किया।


जमानत अर्जी दाखिल, बचाव पक्ष का दावा—शिवम नहीं चला रहा था कार

‘ड्राइवर मोहन चला रहा था, शिवम अस्पताल में था’

शिवम मिश्रा के वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल करते हुए दावा किया कि हादसे के वक्त कार शिवम नहीं, बल्कि उसका ड्राइवर मोहन चला रहा था। वकील का कहना है कि शिवम की तबीयत खराब थी और वह अस्पताल में भर्ती था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी गैर-कानूनी है और अदालत में इस संबंध में दलीलें पेश की जाएंगी।


मिर्गी के दौरे का तर्क, CCTV ने उठाए सवाल

वायरल वीडियो में ड्राइविंग सीट पर दिखा शिवम

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिवम को मिर्गी के दौरे आते हैं और हादसे के समय उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। हालांकि, घटना के तुरंत बाद सामने आए CCTV और मोबाइल वीडियो फुटेज ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि दुर्घटना के बाद एक बाउंसर ड्राइविंग सीट से शिवम मिश्रा को बाहर निकाल रहा है। गाड़ी में कोई अन्य ड्राइवर नजर नहीं आ रहा। बाउंसर वॉकी-टॉकी पर पुलिस से बात करते और भीड़ को हटने के लिए कहते दिख रहे हैं।

इससे पहले शिवम के पिता और वकील ने बयान दिया था कि कार ड्राइवर मोहन चला रहा था। मोहन ने कोर्ट में एफिडेविट भी दाखिल किया था, जिसमें खुद को चालक बताया था।


ड्राइवर मोहन की याचिका खारिज

कोर्ट ने कहा—पुलिस रिकॉर्ड में वांछित नहीं

बुधवार को ड्राइवर मोहन ने अदालत में सरेंडर करने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पुलिस रिकॉर्ड में मोहन वांछित आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए आत्मसमर्पण स्वीकार नहीं किया जा सकता।

साथ ही, लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज करने की अर्जी पर कोर्ट ने पुलिस से तकनीकी जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।


क्या है पूरा मामला?

8 फरवरी, रविवार रात करीब 8 बजे, कानपुर के पॉश इलाके ग्वालटोली की ‘वीआईपी रोड’ पर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा ने कथित तौर पर तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से राहगीरों को टक्कर मार दी। हादसे में छह लोग घायल हो गए।

चश्मदीदों के मुताबिक, कार ने पहले एक ऑटो-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिल से जा भिड़ी। मोटरसाइकिल सवार करीब 10 फीट हवा में उछल गया। घटना के बाद शहर में आक्रोश फैल गया और पुलिस ने FIR में शिवम मिश्रा का नाम जोड़ दिया।

अब मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि आरोपी को जमानत मिलेगी या न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।

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