MP HighCourt : मध्यप्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल दौर में कदम रखने जा रही है। जबलपुर में आयोजित ‘फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया-यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ कार्यक्रम में कई नई डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत की गई।
इस बड़े कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कई वरिष्ठ न्यायाधीश मौजूद रहे।
इस दौरान मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने ऐसे हाईटेक प्लेटफॉर्म लॉन्च किए जो न्याय व्यवस्था को तेज, पारदर्शी और आम जनता के लिए आसान बनाने वाले हैं।
MP HighCourt अब कोर्ट ऑर्डर मिलेगा मोबाइल पर, खत्म होगी फाइलों की दौड़!
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब कोर्ट ऑर्डर की डिजिटल कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। यानी लोगों को फैसले की कॉपी लेने के लिए कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे।
इससे न सिर्फ समय की बचत होगी बल्कि कागजी प्रक्रिया भी काफी कम हो जाएगी। डिजिटल सिस्टम आने के बाद वकीलों और आम नागरिकों दोनों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

MP HighCourt लाइव स्ट्रीमिंग से घर बैठे देख सकेंगे कोर्ट की कार्यवाही!
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए लाइव स्ट्रीमिंग सिस्टम भी लॉन्च किया है।
अब कुछ मामलों की सुनवाई ऑनलाइन लाइव देखी जा सकेगी। इससे लोगों को न्याय प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी और कोर्ट की कार्यवाही पहले से ज्यादा खुली और पारदर्शी बन सकेगी। डिजिटल इंडिया के दौर में इसे न्यायपालिका का बड़ा कदम माना जा रहा है।
MP HighCourt मूक-बधिर लोगों के लिए आया खास मोबाइल एप!
कार्यक्रम में मूक-बधिर नागरिकों के लिए एक विशेष मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया। इस एप का मकसद ऐसे लोगों को न्यायिक सेवाओं से जोड़ना है जिन्हें संवाद करने में कठिनाई होती है।
सरकार और हाई कोर्ट का मानना है कि तकनीक की मदद से अब हर वर्ग तक न्याय पहुंचाना आसान होगा। यह पहल सामाजिक समावेशन और डिजिटल न्याय व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
MP HighCourt ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम से तेज होगा इंसाफ!
नई व्यवस्था में ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम भी शामिल किया गया है। इस सिस्टम के जरिए कोर्ट, पुलिस, जेल, फॉरेंसिक और अन्य विभागों के बीच डेटा शेयरिंग तेज और आसान होगी।
इससे केस की जानकारी अलग-अलग विभागों में जल्दी पहुंच सकेगी और न्याय प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबित मामलों की संख्या घटाने में भी मदद मिल सकती है।

AI टेक्नोलॉजी भी अब संभालेगी कोर्ट का डेटा!
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने AI आधारित डेटा मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। यह सिस्टम केस रिकॉर्ड, दस्तावेज और न्यायिक डेटा को स्मार्ट तरीके से मैनेज करेगा।
AI तकनीक की मदद से जरूरी दस्तावेज जल्दी खोजे जा सकेंगे और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकेगी। आने वाले समय में यह टेक्नोलॉजी अदालतों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
MP HighCourt मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले – तकनीक ही न्याय का भविष्य!
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि भारत की न्याय परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के समय से मजबूत रही है।उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में तकनीक न्याय प्रणाली को सरल और प्रभावी बनाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई डिजिटल सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे आम नागरिकों को बड़ा फायदा मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार साइबर तहसील और ई-फाइल कैबिनेट जैसी योजनाओं के जरिए प्रशासन को डिजिटल रूप से मजबूत बना रही है।
MP HighCourt चीफ जस्टिस सूर्यकांत बोले – कोर्ट को भी बनना होगा 24X7 सिस्टम!
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका को अस्पतालों की तरह 24X7 कार्य करने की जरूरत बताई।उन्होंने कहा कि जैसे अस्पताल में मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक क्लिक में मिल जाती है, वैसे ही न्यायिक व्यवस्था में भी कोर्ट, पुलिस, जेल और फॉरेंसिक सिस्टम को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ना जरूरी है।
उनका मानना है कि तकनीक के जरिए लोगों को अर्जेंट मामलों में तुरंत राहत मिल सकती है। उन्होंने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के डिजिटल मॉडल को देशभर के लिए उदाहरण बताया।
MP HighCourt अब तेजी से मिलेगा इंसाफ, कम होगी लोगों की परेशानी!
नई डिजिटल सुविधाओं के लागू होने के बाद लोगों को न्याय पाने के लिए कम भागदौड़ करनी पड़ेगी। ई-फाइलिंग, डिजिटल सर्टिफिकेशन और ऑनलाइन रिकॉर्ड जैसी सुविधाओं से केस की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

इससे वकीलों, न्यायाधीशों और आम नागरिकों तीनों को फायदा मिलेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में देश की ज्यादातर अदालतें इसी तरह पूरी तरह डिजिटल सिस्टम पर काम कर सकती हैं।
MP HighCourt का डिजिटल मॉडल बदल सकता है पूरे देश का सिस्टम!
जबलपुर में शुरू हुई यह पहल सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं मानी जा रही। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल होता है तो दूसरे राज्यों की अदालतें भी इसे अपनाने की कोशिश करेंगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए न्याय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बनाना अब न्यायपालिका की बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। ऐसे में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की यह पहल देश की न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है।











