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नहीं होगी झूठी FIR, एमपी हाई कोर्ट का अहम फैसला, पुलिसकर्मियों को राहत

जबलपुर। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति बी पी शर्मा ने एक अहम फैसले में एफआईआर दर्ज कराने हेतु लगी याचिका को खारिज कर दिया। अधिवक्ता अजय रायजादा एवं अमित रायजादा ने बताया कि नरसिंहपुर निवासी विपिन पटेल ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर विश्राम सिंह, एसआई, संजय पांडे एवं आशीष मिश्रा कांस्टेबल के विरुद्ध एफ आई दर्ज करने की प्रार्थना की थी।

याचिकाकर्ता का कथन था कि दिनांक 1 दिसंबर 2020 को नरसिंहपुर पुलिस ने उसके साथ मारपीट की थी, जब वह शिकायत करने थाने पहुंचा तो उसकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई, जबकि शिकायतकर्ता ने पुलिस के सभी उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की थी।

प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि उक्त शिकायतकर्ता को नरसिंहपुर पुलिस ने बाजार में नशे की हालत में बाजार में उत्पात मचाते हुए पकड़ कर उसके विरुद्ध कार्यवाही की थी। याचिकाकर्ता कि शिकायत पर एसडीओपी नरसिंहपुर में जांच की ओर पाया कि शिकायतकर्ता दबाव बनाने के उद्देश्य से पुलिस कर्मचारियों के ऊपर झूठी शिकायत दर्ज कर रहा है।

माननीय न्यायालय ने तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए पाया कि कोई भी प्राथमिकी, जिसे चुनौती देने की मांग की गई है, रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मामले के तथ्यात्मक विवरण को बताने या याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज किए गए कथित अपराध की प्रकृति को स्पष्ट करने में भी विफल रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से दी गई ऐसी अस्पष्ट और अस्थिर दलीलों को देखते हुए, वर्तमान याचिका में कोई राहत नहीं दी जा सकती एवं याचिका खारिज की जाती है।

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