मध्य प्रदेश के उज्जैन में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां इंग्लैंड, इटली और स्पेन के तीन यूरोपीय जोड़ों ने आनंदमय आश्रम में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया। शिप्रा नदी के पवित्र तट पर डॉ. ओमानंद महाराज की देखरेख में विवाह की सभी रस्में संपन्न हुईं।
इस दौरान जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वचन लिए और पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेकर सप्तपदी की परंपरा निभाई। नवविवाहित जोड़ों ने सुखी और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध दांपत्य जीवन की कामना के साथ वैदिक रीति से पूजा-अर्चना और प्रार्थना भी की।
भारतीय संस्कृति के रंग में रंगा उज्जैन
इस शादी में पारंपरिक भारतीय विवाह से जुड़े रंग, संगीत, रीति-रिवाज और अपनापन देखने को मिला। आश्रम परिसर में ढोल-नगाड़ों और ढोलक की थाप पर नाचते हुए भक्तों और मेहमानों ने जश्न मनाया। विदेशी जोड़ों ने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ हर रस्म में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. ओमानंद गुरुजी ने भारतीय दर्शन में विवाह के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विवाह केवल एक कानूनी समझौता नहीं, बल्कि दो आत्माओं का दिव्य मिलन है। उन्होंने ‘पाणिग्रहण संस्कार’ को सोलह पवित्र हिंदू संस्कारों में से एक बताया, जो मोक्ष की ओर जोड़े की साझा आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है।
सनातन रीति-रिवाज से हुआ विवाह
आश्रम के अनुसार, ये जोड़े शुरू में योग और ध्यान सीखने आए थे। भारतीय मूल्यों, सनातन संस्कृति और आपसी सम्मान से प्रेरित होकर उन्होंने वैदिक रीति-रिवाजों से शादी करने का फैसला किया। इस समारोह ने भारतीय आध्यात्मिकता और परंपराओं में बढ़ती वैश्विक रुचि को उजागर किया।











