Thursday, October 22, 2026
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लाल किले से मोदी ने रचा इतिहास, लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराकर बनाया 25वें झंडोत्तोलन का रिकॉर्ड

नई दिल्ली. देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराया. इसके साथ ही मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक शासन प्रमुख के रूप में स्वतंत्रता दिवस पर लगातार 25वीं बार राष्ट्रध्वज फहराने का उनका सफर पूरा हुआ. 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह इसलिए भी खास रहा क्योंकि मोदी ने लाल किले से अपने लगातार 13वें संबोधन के साथ स्वतंत्रता दिवस पर लगातार संबोधन देने के मामले में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया.

25 बार झंडोत्तोलन की यात्रा

नरेंद्र मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शासन की कमान संभाली थी.
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने 2002 से 2013 तक स्वतंत्रता दिवस पर राज्य स्तरीय समारोहों में तिरंगा फहराया.
मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद 15 अगस्त 2014 से लाल किले की प्राचीर से लगातार तिरंगा फहराते आ रहे हैं.
2026 में लाल किले से यह उनका लगातार 13वां ध्वजारोहण रहा.
मुख्यमंत्री के रूप में 12 और प्रधानमंत्री के रूप में 13 अवसरों को जोड़ने पर यह संख्या 25 तक पहुंचती है.

लाल किले का मंच बना राजनीतिक संवाद का केंद्र

प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वतंत्रता दिवस का संबोधन नरेंद्र मोदी के लिए केवल परंपरागत भाषण नहीं रहा. उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल सरकार की प्राथमिकताओं, नई योजनाओं और लंबी अवधि के लक्ष्यों को देश के सामने रखने के लिए किया. 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन से ही उन्होंने स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय अभियान से जोड़ा. बाद के वर्षों में जल, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, आत्मनिर्भरता, विनिर्माण और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी उनके स्वतंत्रता दिवस संबोधनों में प्रमुख रहे.

2019 में लाल किले से हर घर जल का लक्ष्य सामने रखा गया, जबकि 2021 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति का संकेत दिया गया. सरकारी प्रकाशन में इन घोषणाओं को स्वतंत्रता दिवस के संबोधनों से जुड़ी प्रमुख पहलों के रूप में दर्ज किया गया है.

गुजरात से शुरू हुई शैली राष्ट्रीय मंच तक पहुंची

मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधनों की शैली को समझने के लिए गुजरात का मुख्यमंत्री कार्यकाल महत्वपूर्ण है. मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोहों को राज्य की राजधानी तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग स्थानों तक ले जाने की परंपरा को बढ़ावा दिया. पाटण जैसे ऐतिहासिक शहर में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित करना इसी सोच का हिस्सा था.

इससे स्वतंत्रता दिवस समारोह का दायरा प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर स्थानीय लोगों की भागीदारी वाले आयोजन के रूप में सामने आया. यही शैली बाद में राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दी, जहां लाल किले का मंच सरकार की उपलब्धियों और आगामी लक्ष्यों के साथ जनता से सीधे संवाद का माध्यम बन गया.

2014 के बाद हर साल बदला फोकस

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के 13 स्वतंत्रता दिवस संबोधनों को देखें तो इनमें समय के साथ सरकार की प्राथमिकताओं का बदलाव भी दिखाई देता है.

2014 में स्वच्छ भारत और स्वच्छता पर जोर रहा.
2015 में सरकारी नौकरियों में निचले स्तर के पदों के लिए इंटरव्यू खत्म करने जैसी घोषणा की गई.
2019 में हर घर जल का लक्ष्य सामने रखा गया.
2021 में ऊर्जा क्षेत्र और राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन को लेकर बड़ा विजन रखा गया.
इसके बाद आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और युवाओं की भूमिका जैसे विषय लगातार चर्चा में आए. 2026 में फोकस विकसित भारत 2047, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी क्षमता, युवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दिखाई दिया.

2026 के भाषण में भविष्य पर सबसे ज्यादा जोर इस बार प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखा. उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास की बात कही. भाषण में युवाओं, किसानों और महिलाओं को देश की विकास यात्रा की प्रमुख ताकतों के रूप में रेखांकित किया गया. साथ ही नई पीढ़ी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों से जोड़ने और मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग जैसी पहलों का उल्लेख किया गया.

यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वतंत्रता दिवस के मंच से प्रधानमंत्री का जोर अब केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान पर नहीं, बल्कि अगले दो दशकों की आर्थिक और तकनीकी दिशा पर भी है.

प्रशासनिक यात्रा में भी बनाया बड़ा रिकॉर्ड

ध्वजारोहण के रिकॉर्ड के साथ मोदी की प्रशासनिक यात्रा ने भी 2026 में महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज किया. 10 जून 2026 को वह भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने. उनके लगातार प्रधानमंत्री कार्यकाल ने जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा और मोदी की लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा 4,399 दिन तक पहुंची.

इसके कुछ महीने पहले मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में किसी सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबी लगातार सेवा का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था. PIB के अनुसार उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पार किया था.

13वां संबोधन भी ऐतिहासिक

15 अगस्त 2026 का संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि मोदी लगातार 13 स्वतंत्रता दिवस भाषण देने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने. इस मामले में जवाहरलाल नेहरू सबसे आगे हैं. मोदी ने इस आंकड़े के साथ इंदिरा गांधी के लगातार स्वतंत्रता दिवस संबोधनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया.

हालांकि रिकॉर्ड केवल संख्या तक सीमित नहीं है. लाल किले से लगातार संबोधन ने मोदी को एक ऐसा मंच दिया है जहां वह हर वर्ष सरकार के कामकाज का राजनीतिक और प्रशासनिक खाका देश के सामने रखते हैं. इस वजह से स्वतंत्रता दिवस का उनका भाषण सरकार की आगामी दिशा का संकेतक भी माना जाने लगा है.

25 साल की प्रशासनिक यात्रा का पड़ाव

मोदी की शासन यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू उनका 25 साल से अधिक समय तक सरकार के शीर्ष पर बने रहना है. 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी प्रशासनिक यात्रा शुरू हुई थी. इसके बाद 2014 में उन्होंने केंद्र की सत्ता संभाली और तब से लगातार प्रधानमंत्री हैं. मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने उन्हें भारत में सबसे लंबे समय तक लगातार सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य करने वाला नेता बताया था.

इस लिहाज से 2026 का स्वतंत्रता दिवस उनके लिए दो अलग-अलग रिकॉर्ड को एक साथ जोड़ता दिखाई दिया—एक तरफ स्वतंत्रता दिवस पर 25वीं बार शासन प्रमुख के रूप में तिरंगा फहराने का पड़ाव और दूसरी तरफ 25 वर्ष से अधिक की प्रशासनिक यात्रा.

अब अगली कसौटी 2047 का लक्ष्य

मोदी की राजनीतिक यात्रा में स्वतंत्रता दिवस के मंच की भूमिका अब एक नए चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है. शुरुआती वर्षों में जहां बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक सुधारों पर जोर था, वहीं अब 2047 को लक्ष्य बनाकर अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और युवा शक्ति को आगे बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने पहले भी 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को स्वतंत्रता की शताब्दी से जोड़ते हुए कहा है कि आज लिए गए संकल्पों का मूल्यांकन आने वाली पीढ़ी उपलब्धियों के रूप में करेगी.

इस तरह 15 अगस्त 2026 का दिन मोदी के लिए केवल एक और स्वतंत्रता दिवस समारोह नहीं रहा. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई ध्वजारोहण की परंपरा लाल किले की प्राचीर तक पहुंचकर 25वें पड़ाव पर पहुंची, जबकि लगातार 13वें प्रधानमंत्री के रूप में संबोधन ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर एक और ऐतिहासिक मुकाम दिया. अब इस रिकॉर्ड के साथ उनके सामने अगली बड़ी चुनौती 2047 के उस लक्ष्य को जमीन पर उतारने की है, जिसे उन्होंने लाल किले से देश के सामने रखा है.

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