महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आस्था, प्रेम और धार्मिक परंपराओं को लेकर नई बहस छेड़ दी। उजमा खान और तमन्ना मलिक नाम की दो मुस्लिम महिलाओं ने अपनी मन्नत पूरी होने पर कांवड़ यात्रा में हिस्सा लिया और भगवान शिव के मंदिर में जलाभिषेक किया।
उजमा खान ने बताया कि उन्होंने भगवान शिव से अपने प्रेमी लोकेन्द्र सिंह से विवाह की मन्नत मांगी थी, जो पूरी हो गई। मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने कांवड़ यात्रा कर जल चढ़ाने का संकल्प निभाया। वहीं तमन्ना मलिक ने भी अमन त्यागी से शादी की इच्छा पूरी होने पर कांवड़ यात्रा में शामिल होकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। दोनों महिलाओं का कहना है कि उनका यह कदम किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि अपने प्रेम और विश्वास के सम्मान में उठाया गया है।
हालांकि, इस घटना पर विवाद भी खड़ा हो गया। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, जो ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, ने इसे इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि किसी अन्य धर्म की धार्मिक परंपराओं में इस तरह भाग लेना उचित नहीं है।
संभल से सांसद जियाउर रहमान बर्क ने भी इस कदम पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत बताया।इस बीच उजमा खान और मौलाना साजिद रशीदी के बीच इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस भी देखने को मिली, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने धर्म और आस्था के आधार पर तर्क रखे।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक परंपराओं की सीमाएं कहां तक तय की जानी चाहिए — और क्या प्रेम व विश्वास इन सीमाओं से परे हो सकते हैं।











