Railway News : नई दिल्ली-रानी कमलापति (भोपाल) शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को नाश्ते में एक्सपायरी (अवधि पार) ब्रेड परोस दी गई.
इस लापरवाही के कारण छोटे बच्चों समेत कई यात्रियों को फूड पॉइजनिंग होने की आशंका जताई जा रही है. घटना से गुस्साए यात्रियों ने ट्रेन में हंगामा किया और ‘रेल मदद’ ऐप सहित ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग (कंज्यूमर कमीशन) पोर्टल पर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है.
खाने के बाद गई तारीख पर नजर, मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना ट्रेन के सी-4 कोच में सामने आई, जिसमें करीब 74 यात्री सफर कर रहे थे. सुबह जब कैटरिंग स्टाफ ने सभी को नाश्ता दिया, तो अधिकांश यात्री ब्रेड खा चुके थे. इसी दौरान पीछे बैठे एक यात्री की नजर पैकेट पर छपी ‘यूज बाय’ डेट पर गई, जिस पर 10 जुलाई 2026 लिखा हुआ था, जबकि शनिवार को 11 जुलाई 2026 थी. यानी ब्रेड एक दिन पहले ही एक्सपायर हो चुकी थी. यह बात फैलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों में फूड पॉइजनिंग के डर से हड़कंप साफ देखा गया.
एक कोच नहीं, पूरी ट्रेन में सप्लाई की आशंका
सफर कर रहे यात्रियों ने बताया कि अधिकांश लोग अनजाने में यह दूषित नाश्ता कर चुके थे. यात्रियों का आरोप है कि यह मामला केवल सी-4 कोच तक सीमित नहीं था. जब कोच के बाहर रखे कैटरिंग पैकेट्स की जांच की गई, तो वहां भी उसी एक्सपायरी डेट वाली ब्रेड के बंडल मिले. इससे आशंका जताई जा रही है कि पेंट्री कार स्टाफ द्वारा यह एक्सपायरी ब्रेड ट्रेन के कई अन्य कोचों में भी सप्लाई की गई होगी. यात्रियों ने सवाल उठाया कि रेलवे की इस घोर लापरवाही के कारण यदि बच्चों या बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
आईआरसीटीसी ने झाड़ा पल्ला, नॉर्दर्न रेलवे पर मढ़ा दोष
शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेन में खानपान के इस बेहद निचले स्तर पर जब आईआरसीटीसी के अधिकारी स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई का आश्वासन देने के बजाय पल्ला झाड़ रहे हैं. मामले में आईआरसीटीसी के रीजनल अधिकारी मनोरंजन बिनकर द्वारा अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए तर्क ये दिया जा रहा है कि यह नॉर्दर्न रेलवे (उत्तर रेलवे) की ट्रेन है और इसका खाना वहीं (दिल्ली) से लोड किया जाता है. रेलवे नियमावली के अनुसार, शताब्दी एक्सप्रेस के संचालन और ऑनबोर्ड कैटरिंग की पूरी जिम्मेदारी संबंधित रेलवे जोन के पास ही होती है. हालांकि, इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब के बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है.











