Thursday, May 21, 2026
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Dog Lovers को झटका! SC कोर्ट ने दिया सख्त आदेश

Dog Lovers: देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक और डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने अपने पुराने आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला जारी रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जिन आवारा कुत्तों को इन जगहों से हटाया जाएगा, उन्हें दोबारा उसी इलाके में छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। अदालत का कहना है कि आम लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों के “राइट टू लाइफ” की रक्षा करें।

Dog Lovers: डॉग लवर्स की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया जिनमें डॉग लवर्स ने कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के फैसले को वापस लेने की मांग की थी। अदालत ने साफ कहा कि इंसानों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

Dog Lovers
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मामले की सुनवाई जस्टिस Vikram Nath की अगुवाई वाली बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने देशभर में बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की समस्या पर गंभीर चिंता जताई और राज्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

Dog Lovers: राज्यों की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के हिसाब से जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास नहीं किया गया। नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान भी बिना किसी ठोस योजना के चलाए गए, जिसके कारण पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ गई।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकारों और नगर निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज हालात इतने खराब नहीं होते। अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

Dog Lovers: स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन होंगे स्ट्रे डॉग फ्री

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखना जरूरी है। अदालत का मानना है कि इन जगहों पर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की सुरक्षा सबसे ज्यादा अहम है।

कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे संवेदनशील इलाकों में डॉग बाइट की घटनाएं होती हैं तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्यों और नगर निगमों पर दबाव बढ़ गया है कि वे इन क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित बनाएं।

Dog Lovers: हर जिले में बनेगा ABC सेंटर

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को Animal Birth Control यानी ABC गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित राज्यों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

Dog Lovers
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कोर्ट ने निर्देश दिया कि देश के हर जिले में कम से कम एक ABC सेंटर स्थापित किया जाए। इन सेंटरों में प्रशिक्षित पशु चिकित्सक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन सही तरीके से हो सके। अदालत ने माना कि मौजूदा व्यवस्था कई जगहों पर बेहद कमजोर है और इसका सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।

Dog Lovers: डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि उसे लगातार हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों और शहरी केंद्रों से शिकायतें मिल रही हैं।

कोर्ट ने खास तौर पर Indira Gandhi International Airport का जिक्र करते हुए कहा कि देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट पर बार-बार कुत्तों के काटने की घटनाएं होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर इतने महत्वपूर्ण स्थानों पर भी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है तो यह चिंता का विषय है।

Dog Lovers: विदेशी नागरिकों के साथ घटनाओं पर भी नाराजगी

अदालत ने गुजरात के सूरत में एक जर्मन यात्री को आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं सिर्फ नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं, बल्कि देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब विदेशी नागरिक भारत आते हैं और इस तरह की घटनाओं का सामना करते हैं तो इससे शहरी प्रशासन और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं। इससे जनता और पर्यटकों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता है।

Dog Lovers
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Dog Lovers: “राइट टू लाइफ” सबसे महत्वपूर्ण

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि “राइट टू लाइफ” यानी जीवन का अधिकार सबसे ऊपर है। राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु संरक्षण जरूरी है, लेकिन इंसानों की जान और सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। अदालत ने संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से समस्या का समाधान निकालने पर जोर दिया।

Dog Lovers: अब राज्यों पर बढ़ा दबाव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी राज्यों और नगर निकायों पर दबाव बढ़ गया है। उन्हें संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखना होगा और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू करनी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला आने वाले समय में देशभर में स्ट्रे डॉग मैनेजमेंट को लेकर बड़ा बदलाव ला सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।

Dog Lovers: आम लोगों को राहत की उम्मीद

देशभर में लगातार बढ़ रही डॉग बाइट घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आम लोगों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुरक्षा को लेकर लोग लंबे समय से चिंता जता रहे थे।

अब अदालत के सख्त निर्देशों के बाद उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस समस्या पर तेजी से काम करेगा और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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