विद्युत तंत्र को चलायमान रखने वाले सभी लाइन कर्मियों को बिना भेदभाव जोखिम बीमा एवं कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी जाए, इस मामले में मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा है कि विद्युत कंपनियों में लगातार कर्मचारियों के लगातार सेवानिवृत होने से विद्युत तंत्र को चलायमान रखने वाले नियमित कर्मचारियों की अत्यधिक कमी होने से जमीनी अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
इस मुद्दे को लेकर संघ के पदाधिकारियों की एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें चिंता व्यक्ति की गई है कि एक विद्युत पोल में लगातार तीन-तीन सप्लाई आती है, इस सिस्टम और सप्लाई को जानने वाले लाइन कर्मचारी सेवानिवृत हो चुके हैं। इससे बिजली कंपनियों में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो रही है, वहीं इस स्थिति से निपटने के लिए बिजली कंपनियों के प्रबंधन एवं मध्य प्रदेश शासन के द्वारा पिछले 30 वर्षों से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
हरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा है कि अब चूंकि अनुभवी लाइन कर्मियों की कमी है, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे विद्युत कंपनियों को चलाया जा रहा है, जो कि तकनीकी रूप से और नियमानुसार गलत एवं चिंताजनक है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आदेश किए जा चुके हैं कि ठंड, गर्मी तथा बरसात में बारहमासी कार्य करने वाले उद्योगों में नियमित कर्मचारी की नियुक्ति करना चाहिए, मगर इस बात को भी ना विद्युत कंपनी प्रबंधन मानता है ना मध्य प्रदेश शासन, सिर्फ विद्युत तंत्र को चलायमान रखने वाले तकनीकी कर्मचारियों का लगातार शोषण करना चाहते हैं।
हरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि संघ द्वारा अनेक वर्षों से मध्य प्रदेश शासन एवं विद्युत कंपनी प्रबंधनों से पत्राचार एवं ज्ञापन पत्रों के माध्यम से अनेक बार मांग की गई है कि इतने बड़े विद्युत उद्योग में कार्य करने वाले तकनीकी कर्मचारियों का 20 लाख का बीमा एवं दुर्घटना होने पर कैशलेस उपचार की सुविधा दी जाए, मगर उस पर अभी भी किसी प्रकार से कर्मचारियों के हित में कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है। मध्य प्रदेश पावर जनरेशन कंपनी प्रबंधन के द्वारा सेवानिवृत्त एवं बिजली कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए कैशलेस बीमा की योजना लाई गई थी, लेकिन दुर्भाग्य से इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
संघ के अजय कश्यप, राजकुमार सैनी, लखन सिंह राजपूत, राजू नायडू, राजेश झरिया, जेपी त्रिपाठी, इंद्रपाल सिंह, मोतीलाल बुनकर, किशोर बांदेकर, रमेश पाल, बी टेमरे आदि ने विद्युत कंपनी एवं मध्य प्रदेश शासन से मांग की है कि विद्युत कंपनियों में जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले सभी नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को जोखिम बीमा एवं कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी जाए और इसमें किसी के साथ भेदभाव न करते हुए सभी बिजली कंपनियों के सभी लाइन कर्मियों को बीमा का लाभ दिया जाए।











