MP Electricity: मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ बिजली कंपनियों ने फ्यूल कॉस्ट एंड पावर परचेज एग्रीमेंट (FCPPA) सरचार्ज बढ़ा दिया है। इसके कारण बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आएंगे। दूसरी ओर, प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने के कारण जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन घट गया है। इसका असर अब बिजली आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बिजली मांग और कम उत्पादन की स्थिति ने बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की घटनाएं बढ़ने लगी हैं।
MP Electricity: FCPPA सरचार्ज बढ़ने से महंगा होगा बिजली बिल
बिजली कंपनियों ने FCPPA सरचार्ज को 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया है। यानी अब उपभोक्ताओं को पहले के मुकाबले 2.66 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा।
इस फैसले का असर प्रदेश के करीब 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। वहीं, केवल भोपाल क्षेत्र में ही लगभग 1.25 लाख घरेलू उपभोक्ता इससे प्रभावित होंगे। इसके कारण अगस्त महीने से आने वाले बिजली बिलों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
MP Electricity: 200 से 300 यूनिट खर्च करने वालों पर ज्यादा असर
बिजली कंपनियों के अनुसार जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 200 से 300 यूनिट के बीच रहती है, उनके अगस्त महीने के बिल में करीब ₹35 से ₹87 तक अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है।
हालांकि यह बढ़ोतरी उपभोक्ता की वास्तविक बिजली खपत के अनुसार अलग-अलग होगी। अधिक यूनिट खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के बिल पर इसका असर और अधिक दिखाई दे सकता है।
MP Electricity: कम बारिश से घटा बिजली उत्पादन
इस बार मानसून की धीमी रफ्तार का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। प्रदेश के कई प्रमुख हाइडल (जल विद्युत) प्रोजेक्ट पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार बरगी, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और बाणसागर जैसी प्रमुख परियोजनाओं में पानी का स्तर अपेक्षाकृत कम है। परिणामस्वरूप इन परियोजनाओं से बिजली उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।
इसके चलते बिजली कंपनियों को अब थर्मल और अन्य स्रोतों से अधिक बिजली खरीदनी पड़ रही है। इससे उत्पादन लागत भी बढ़ रही है।
MP Electricity: ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी बिजली कटौती
कम उत्पादन का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई गांवों में रात के समय कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
भोपाल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी रुक-रुककर बिजली जाने की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ किसानों और छोटे कारोबारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि बिजली कंपनियों का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
MP Electricity: एक साल में 37 प्रतिशत बढ़ी बिजली की मांग
उधर, प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष 27 जुलाई के आसपास अधिकतम बिजली मांग करीब 10,024 मेगावाट थी।
वहीं इस वर्ष इसी अवधि में यह बढ़कर 13,757 मेगावाट तक पहुंच गई है। यानी केवल एक वर्ष में बिजली की अधिकतम मांग में लगभग 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती मांग और घटते उत्पादन के कारण बिजली कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
MP Electricity: लोड मैनेजमेंट पर बढ़ा फोकस
मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि कम बारिश के कारण जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसलिए वर्तमान में लोड मैनेजमेंट के जरिए बिजली आपूर्ति को संतुलित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए बिजली संयंत्रों के रखरखाव और उत्पादन क्षमता पर भी लगातार काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य यह है कि आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सके।
MP Electricity: आने वाले दिनों में क्या हो सकता है असर?
यदि प्रदेश में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तो जलाशयों का जलस्तर बढ़ने से हाइडल परियोजनाओं का उत्पादन भी सुधर सकता है। इससे बिजली आपूर्ति पर बना दबाव कुछ हद तक कम होने की संभावना है।
हालांकि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है और बिजली की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो बिजली कंपनियों को अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिल और कुछ क्षेत्रों में कटौती जैसी चुनौतियों का सामना आगे भी करना पड़ सकता है।











