भगवान श्रीहरि विष्णु के आठवें अवतार योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के 16 कलाओं से युक्त पूर्णावतार, भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की संस्थापना हेतु माता देवकी के गर्भ से मथुरा नामक पावन नगरी में मानव रूप में अवतार लिया था।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग के अंत में भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में राक्षस कंस के अत्याचारों से धरती को मुक्त कराने के लिए हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हमारे सनातन धर्म मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को एक प्रमुख त्योहार की दृष्टि से देखा जाता है और पूरे देश-दुनिया में बड़े हर्षोल्लास से इस त्यौहार को मनाया जाता है।
इस दिन मंदिरों में आकर्षक सजावट की जाती है और लोग घरों में भी झांकियां आदि सजाकर श्रीकृष्ण जी का जन्म कराते हैं और छप्पन भोग लगाकर पूजा उपासना करते हैं। तुलसी दल युक्त माखन, मिश्री, दूध दही, पंजीरी और रामदाने के लड्डू, फल इत्यादि भगवान श्री कृष्ण के प्रिय भोग है।
इस वर्ष किस दिन है जन्माष्टमी?
वर्ष 2025 में भगवान श्रीकृष्ण का 5252वाँ जन्मोत्सव मनाया जायेगा। गृहस्थ उपासक शुक्रवार 15 अगस्त 2025 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे, जबकि वैष्णव सम्प्रदाय शनिवार 16 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएगा।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारम्भ 15 अगस्त 2025 को 11:49 (PM) बजे होगा और अष्टमी तिथि का समापन 16 अगस्त 2025 को 09:34 (PM) बजे होगा।
वहीं रोहिणी नक्षत्र का प्रारम्भ 17 अगस्त 2025 को तड़के 4:38 (AM) बजे होगा, जबकि रोहिणी नक्षत्र का समापन 18 अगस्त 2025 को 3:17 (AM) बजे होगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार 15 अगस्त और शनिवार 16 अगस्त 2025 की मध्य रात्रि यानि शनिवार 16 अगस्त को निशिता पूजा का समय 12:04 (AM) बजे से 12:47 (AM) बजे तक रहेगा।











