बिजली कंपनी में 1995 में नियमित हो चुके 1177 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के उच्च वेतनमान के भुगतान पर बिजली कंपनी ने अड़ंगा लगा दिया है और 2 वर्ष की परिवीक्षाधीन अवधि को कुल सर्विस अवधि में शामिल नहीं किया।
जिसके बाद मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने ऊर्जा विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले से अवगत कराया गया। जिस पर संज्ञान लेकर उर्जा विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी के द्वारा पूर्व क्षेत्र कंपनी प्रबंधन से जानकारी मांगी गई है।
हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि तत्कालीन विद्युत मंडल के 1177 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को 1995 में एक आदेश निकाल कर नियमित नियुक्ति दी गई थी। इसी के आधार पर 1177 नियमित कर्मचारियों के द्वारा 30 वर्षीय उच्च वेतनमान के लिए आवेदन दिया गया।
पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी के अधिकारियों ने यह कहकर वापस कर दिया गया कि 1997 से आपकी नियमित नियुक्ति मानी जावेगी एवं दो वर्ष की परिवीक्षाधीन अवधि सर्विस बुक में शामिल नहीं की जावेगी। जबकि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के द्वारा नियमित होने के पूर्व 5 से 7 वर्ष तक अपनी सेवाएं तत्कालीन विद्युत मंडल को दी है।
संघ के संघ के मोहन दुबे, राजकुमार सैनी, अजय कश्यप, मोहन दुबे, लखन सिंह राजपूत, शशि उपाध्याय, दशरथ शर्मा, मदन पटेल, राकेश नामदेव, इंद्रपाल सिंह, संदीप दीपंकर ने पूर्व क्षेत्र कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि जब 1995 में दैनिक वेतन भोगियों को नियमित नियुक्ति दी गई है तो 2 वर्ष की परिवीक्षाधीन अवधि की कटौती कर 1997 से 30 वर्षीय उच्च वेतनमान न दिया जाना कर्मचारियों के अहित में होगा। इसलिए दो वर्षीय परिवीक्षाधीन अवधि सर्विस बुक में शामिल कर कर्मचारियों को 1995 से ही 30 वर्षीय उच्च वेतनमान दिया जाये।










