Monday, July 27, 2026
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एमपी के सभी सरकारी अस्पतालों में बनेंगे गर्भ संस्कार कक्ष: CM डॉ. यादव का बड़ा बयान

इंदौर.मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित दिव्य संतान प्रकल्प कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि राज्य के सभी शासकीय अस्पतालों में जल्द ही गर्भ संस्कार कक्ष स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार के अध्ययन और अध्यापन की विधिवत व्यवस्था की जाएगी।

नीति स्तर पर लागू होगी व्यवस्था, जल्द आएगा गजट नोटिफिकेशन

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल विचार या प्रयोग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सरकारी स्वास्थ्य ढांचे और मेडिकल एजुकेशन सिस्टम का स्थायी हिस्सा बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, ताकि इसे नीति स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

मातृत्व केवल जैविक प्रक्रिया नहीं: सीएम

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मातृत्व केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि गर्भ ही संस्कारों की पहली पाठशाला होता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि गर्भावस्था के पांच से छह महीने बाद शिशु पर मां की भावनाओं, मानसिक स्थिति और आसपास के वातावरण का गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में गर्भ संस्कार कक्षों का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सकारात्मक, शांत और संतुलित वातावरण प्रदान करना है।

सनातन परंपरा और विज्ञान का संगम

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान कभी अलग नहीं रहे हैं। सनातन व्यवस्था के 16 संस्कार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक पद्धति हैं। गर्भ संस्कार का मूल उद्देश्य गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास सुनिश्चित करना है।

मेडिकल शिक्षा में होगा भारतीय चिकित्सा परंपरा का समावेश

सीएम ने बताया कि चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े कॉलेजों में गर्भ संस्कार को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे भविष्य के डॉक्टरों को आयुर्वेद, भारतीय चिकित्सा परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय की समझ विकसित होगी।

आयुर्वेद की भूमिका पर जोर

मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक पद्धतियों को अपनाया गया था। आयुर्वेद में गर्भ संस्कार के महत्व को पहले से स्वीकार किया गया है और अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसके प्रभाव को मान्यता दे रहा है। उन्होंने महाभारत में अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे।

अन्य वक्ताओं के विचार

कार्यक्रम में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत का चिंतन दुनिया को नियंत्रित करने का नहीं, बल्कि उसे मार्ग दिखाने का है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ मानव का निर्माण केवल शिक्षा या भौतिक संपदा से नहीं, बल्कि सुशिक्षा और सुसंस्कार से संभव है। उन्होंने युवाओं और दंपत्तियों से शास्त्रीय मूल्यों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मातृ स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे गर्भवती महिलाओं को बेहतर और सकारात्मक वातावरण मिलेगा और भविष्य की पीढ़ी के सर्वांगीण विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

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