Friday, April 24, 2026
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महिला कर्मचारी से फूंक से कराई जांच पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

जबलपुर। एमपी के भोपाल में डायल-100 कंट्रोल रूम में पदस्थ एक पुलिस इंस्पेक्टर द्वारा महिला कर्मचारी से अमर्यादित तरीके से जांच कराने के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी की सेवा में वापसी पर रोक लगा दी है। साथ ही सिंगल बेंच के उस आदेश पर भी स्टे दे दिया हैए जिसमें उनकी बहाली के निर्देश दिए गए थे। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को होगी।

घटना 30-31 अगस्त 2025 की रात की है, जब भोपाल स्थित डायल-100 कंट्रोल रूम में शिफ्ट सुपरवाइजर के रूप में तैनात इंस्पेक्टर त्रिपाठी ने शराब पीने की जांच के नाम पर एक आउटसोर्स महिला कॉल ऑपरेटर को डिस्पैच हॉल के गेट पर खड़ा कर दिया। इसके बाद उन्होंने पुरुष पुलिस कर्मियों को महिला के मुंह पर फूंक मारने के लिए कहा ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसने शराब पी है।

यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी। महिला कर्मचारी ने नौकरी की प्रकृति के कारण शिकायत नहीं की लेकिन जब सीसीटीवी फुटेज वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो इसे बेहद शर्मनाक मानते हुए इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई। उनके खराब सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 311(2),(इ) के तहत बिना विभागीय जांच के ही उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

सिंगल बेंच ने दी राहत, सरकार ने दी चुनौती-

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 19 फरवरी 2026 को यह कहते हुए बर्खास्तगी रद्द कर दी थी कि आरोपी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की।

सरकार की ओर से कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज पेश कर यह दलील दी गई कि महिला कर्मचारियों के डर और संवेदनशीलता के कारण विभागीय जांच कराना संभव नहीं था। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी और इंस्पेक्टर की बहाली को फिलहाल प्रभावहीन कर दिया।

महिलाओं की गरिमा से जुड़ा मामला-

कोर्ट ने माना कि यह मामला सिर्फ अनुशासन का नहींए बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमाए मानवाधिकार और जांच प्रक्रिया की मर्यादा से जुड़ा है। ऐसे मामलों में किसी भी अपमानजनक तरीके को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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