Friday, April 24, 2026
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जबलपुर में ‘एम्स’ के नाम पर चल रहा निजी अस्पताल, सरकारी डॉक्टरों की भूमिका पर उठे सवाल

जबलपुर। जबलपुर के धनवंतरी नगर चौक पर एम्स नाम से एक अस्पताल संचालित किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे मरीजों में भ्रम की स्थिति बन रही है। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के आर्थो विभाग में पदस्थ डॉ. राकेश तिर्की से जुड़ा है।

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त को शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि देश-विदेश में प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था एम्स के नाम का उपयोग कर मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह किया जा रहा है।

मामले पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी।

भोपाल निवासी रवि परमार ने अपनी शिकायत में मांग की है कि संबंधित अस्पताल का नाम तत्काल बदला जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। उनका आरोप है कि दिल्ली और भोपाल स्थित एम्स के नाम का लाभ उठाकर अस्पताल संचालित किया जा रहा है।

इससे लोगों में यह भ्रम पैदा हो रहा है कि जबलपुर में भी एम्स की शाखा खुल गई है। इसी कारण बड़ी संख्या में मरीज वहां पहुंच रहे हैं, जबकि सुविधाओं के नाम पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के आर्थो विभाग में पदस्थ डॉ. राकेश तिर्की द्वारा निजी अस्पताल का संचालन नियमों के विरुद्ध है।

साथ ही, अस्पताल के नाम में एम्स जैसे प्रतिष्ठित शब्द का उपयोग कर आम जनता को यह आभास दिया जा रहा है कि यह केंद्र सरकार से संबद्ध संस्था है। सरकारी नियमों के अनुसार ऐसी गतिविधियां अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि एम्स जैसे नाम का उपयोग कर मरीजों से इलाज के नाम पर अधिक राशि वसूली जा रही है।

प्रतीक और नाम अधिनियम, 1950 के तहत किसी भी सरकारी संस्था से मिलते-जुलते नाम का उपयोग प्रतिबंधित है, ताकि व्यावसायिक लाभ के लिए सरकारी पहचान का दुरुपयोग न हो सके।

The hospital management defended itself by citing the difference in English letters.

अस्पताल प्रबंधन ने अपने बचाव में अंग्रेजी अक्षरों में मामूली अंतर का तर्क दिया है। हालांकि, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी निजी संस्था को ऐसा नाम रखने की अनुमति नहीं है, जिससे सरकारी संरक्षण का आभास हो। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नाम की ध्वनि और स्वरूप में समानता भी भ्रम पैदा करने के लिए पर्याप्त मानी जाती है।

The health department has started an investigation.

स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जाएगा कि अस्पताल के पंजीकरण के दौरान किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया और क्या इस नाम के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो अस्पताल का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

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