Russian : रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने वाले देशों पर अमेरिका एक बार फिर सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए एक नए विधेयक में रूस से तेल खरीदने वाले देशों के निर्यात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यदि यह विधेयक पारित होकर लागू होता है, तो भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम टैरिफ दर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) की सिफारिशों और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही तय की जाएगी, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
यह विधेयक पहले पेश किए गए “सैंक्शनिंग रशिया एक्ट” का संशोधित और अपेक्षाकृत नरम संस्करण माना जा रहा है. इससे पहले जनवरी 2026 में इसी प्रस्ताव में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया था, लेकिन अब इसे घटाकर अधिकतम 100 प्रतिशत कर दिया गया है. यह विधेयक सबसे पहले अप्रैल 2025 में अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया था. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे समर्थन मिलने की बात कही थी.
वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि नया विधेयक रूस से तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों को लक्षित करेगा. उनके अनुसार वर्तमान में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान रूस के प्रमुख तेल खरीदार हैं. उन्होंने बताया कि यदि कोई देश रूस से गैस खरीदता है, लेकिन उसकी खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है, तो उसे कुछ मामलों में राहत मिल सकती है.
प्रस्तावित कानून के अनुसार अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि परिस्थितियों का मूल्यांकन करने के बाद अंतिम टैरिफ दर तय करेंगे. इसके साथ ही यदि निर्धारित दर में किसी प्रकार की कमी की जाती है तो उसके लिए अमेरिकी कांग्रेस को रिपोर्ट और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा. अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय को कम करना और उसे आर्थिक दबाव में लाना है.
भारत के लिए यह प्रस्ताव विशेष महत्व रखता है क्योंकि वह चीन के बाद रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है. ऊर्जा सुरक्षा और रियायती दरों के कारण भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है. हाल के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. अनुमान है कि इस अवधि में भारत द्वारा खरीदे गए रूसी तेल का मूल्य लगभग 4.5 अरब यूरो रहा, जो रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात राजस्व का लगभग 36 प्रतिशत था.
इससे पहले अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. उस समय कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया और द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत भी प्रभावित हुई.
हालांकि फरवरी 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष और होरमुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई. इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर अस्थायी छूट दी, जिससे भारत ने दोबारा बड़े पैमाने पर रूसी तेल का आयात शुरू कर दिया.
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है. यदि समझौता सफल रहता है तो भारत पर अमेरिकी आयात शुल्क घटकर लगभग 18 प्रतिशत तक आने की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका में 15 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लागू है, जो 24 जुलाई तक प्रभावी रहने की संभावना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी सीनेट का यह नया विधेयक पारित होकर लागू होता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है. साथ ही भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हितों और कूटनीतिक संतुलन के बीच नई चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं. फिलहाल यह विधेयक कानून नहीं बना है और इसके लागू होने से पहले अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे होना बाकी हैं.











