Thursday, July 16, 2026
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जबलपुर में पीने के पानी पर बड़ी News ,NGT ने दिया बड़ा बयान

जबलपुर शहर में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दावा किया गया है कि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइनें नालियों के बीच से गुजर रही हैं, जिससे पानी दूषित होने का खतरा बढ़ गया है। इस मामले को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि शहर में सप्लाई होने वाले पानी का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा पीने योग्य नहीं रह गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, प्रशासनिक लापरवाही के कारण अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को अंतिम मौका देते हुए दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

80 प्रतिशत पाइपलाइन नालियों के बीच से गुजरने का दावा

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जबलपुर की अधिकांश पेयजल पाइपलाइनें वर्षों पुरानी हैं और कई जगह नालियों के बीच से होकर गुजरती हैं। इससे गंदा पानी पाइपलाइन में मिलने की आशंका बनी रहती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसी वजह से शहर में सप्लाई होने वाला पानी कई इलाकों में पीने योग्य नहीं रह गया है।

उनका दावा है कि करीब 47 प्रतिशत पानी दूषित हो चुका है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

जांच में प्रशासनिक लापरवाही आई सामने

NGT ने मामले की जांच के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने एक महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग की कमी के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

10 जुलाई को हुई सुनवाई में बताया गया कि विभागों के बीच समन्वय नहीं होने से स्थल निरीक्षण तक नहीं हो पाया। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई।

NGT ने प्रशासन को दी अंतिम चेतावनी

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दिनेश कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार ने प्रशासनिक असहयोग को गंभीर माना। उन्होंने इसे बेहद आपत्तिजनक बताते हुए प्रशासन को दो सप्ताह का अंतिम समय दिया है।

साथ ही NGT रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह कलेक्टर जबलपुर और नगर निगम को पत्र भेजकर जांच में पूरा सहयोग सुनिश्चित कराए। यदि तय समय में रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है, तो मामले में आगे कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।

40 से 50 साल पुरानी हैं शहर की पाइपलाइनें

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट प्रभात यादव ने बताया कि शहर की अधिकांश जलापूर्ति पाइपलाइनें 40 से 50 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। कई जगह ये पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हैं। इसके बावजूद इन्हें बदलने के लिए अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन बिछाने के लिए आज तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तक तैयार नहीं की गई। ऐसे में समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने की बढ़ी मांग

इस मामले के सामने आने के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी पाइपलाइनें बदलना और जलापूर्ति नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना अब जरूरी हो गया है।

वहीं, NGT के सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग जल्द जांच पूरी करेंगे और समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में शहर के लाखों लोगों की पेयजल सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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