Friday, April 24, 2026
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लोकसेवक के खिलाफ प्राथमिक जांच के लिए अभियोजन स्वीकृति आवश्यक नहीं: हाईकोर्ट

जोधपुर (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने लोकसेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में दायर परिवाद पर प्राथमिक जांच का आदेश देने से पहले अभियोजन स्वीकृति आवश्यक नहीं माना है।

सेशन न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बीकानेर द्वारा पारित दो अलग-अलग आदेशों को चुनौती देने वाली आपराधिक विविध याचिकाओं को खारिज करते हुए न्यायाधीश दिनेश मेहता ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 प्रसंज्ञान के लिए अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता का प्रावधान करती है, लेकिन हस्तगत प्रकरण में सेशन न्यायालय ने केवल प्राथमिक जांच करने के निर्देश दिए हैं।

प्राथमिक जांच और प्रसंज्ञान में महत्वपूर्ण अंतर को रेखांकित करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक तथ्यान्वेषी जांच या प्रारंभिक जांच नहीं की जाती, तब तक सम्बन्धित प्राधिकारी अभियोजन की मंजूरी भी नहीं मांग सकता। अभियोजन स्वीकृति शून्य में जारी नहीं की जा सकती। यहां तक कि अभियोजन स्वीकृति देने वाले प्राधिकारी के पास लोक सेवक के खिलाफ आगे बढऩे की मंजूरी देने या अस्वीकार करने के लिए कुछ सामग्री या प्रथम दृष्टया राय होनी चाहिए।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्राथमिक जांच के बाद याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अपराध बनना पाए जाने पर विधि अनुसार प्रक्रिया अपनाने के निर्देश देते हुए आपराधिक विविध याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया।

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