Thursday, June 18, 2026
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Devkinandan Thakur : सनातन बोर्ड बना तो चवन्नी भी नहीं होगी चोरी

Devkinandan Thakur : अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन और चोरी के आरोपों को लेकर प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भोपाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उन्होंने मंदिरों के प्रबंधन और दान राशि की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए देशभर के मंदिरों के संचालन के लिए सनातन बोर्ड” के गठन की मांग दोहराई।

ठाकुर ने कहा कि यदि सनातन बोर्ड का गठन किया जाता है तो मंदिरों में होने वाली आर्थिक अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी और “चवन्नी तक की हेराफेरी” संभव नहीं होगी। उन्होंने मंदिरों की संपत्तियों और दान राशि के बेहतर प्रबंधन के लिए एक संगठित एवं जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

Devkinandan Thakur : भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने अयोध्या राम मंदिर में दान राशि से जुड़े विवाद का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया धन समाज, धर्म और जनकल्याण के कार्यों में लगना चाहिए, लेकिन जब इस धन के दुरुपयोग या चोरी की खबरें सामने आती हैं तो करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं.

उन्होंने कहा कि इसी कारण लंबे समय से सनातन बोर्ड की मांग की जा रही है. उनके अनुसार मंदिरों की आय और व्यय की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जानी चाहिए. देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि देश में सनातन बोर्ड का गठन होता है तो मंदिरों की संपत्ति और दान राशि का बेहतर प्रबंधन संभव होगा तथा समाजहित के अनेक कार्यों को गति मिलेगी.

कथावाचक ने कहा कि मंदिरों के धन का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसंरक्षण और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे कार्यों में किया जा सकता है. उन्होंने दावा किया कि इससे गरीब बच्चों की पढ़ाई, रोगियों के उपचार और गौशालाओं के संचालन को भी मजबूती मिलेगी. साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता देकर धर्मांतरण जैसी चुनौतियों का सामना करने में भी मदद मिलेगी.

देवकीनंदन ठाकुर ने धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान के धन का दुरुपयोग गंभीर पाप माना गया है. उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों में मंदिर के धन का हरण करने वालों के लिए कठोर परिणाम बताए गए हैं. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिक चिंता दंड नहीं बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है.

उन्होंने वर्ष 2027 में होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए राजनीतिक दलों से भी अपील की. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में आगामी चुनाव होने हैं, वहां की सरकारों को चुनाव से पहले सनातन बोर्ड के गठन पर विचार करना चाहिए. उनके अनुसार देश के चारों शंकराचार्यों में से किसी एक या सामूहिक धार्मिक नेतृत्व के मार्गदर्शन में इस तरह की व्यवस्था बनाई जा सकती है.

गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में दान राशि से जुड़े विवाद की जांच को लेकर विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है. इसी बीच देवकीनंदन ठाकुर का यह बयान धार्मिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिरों की संपत्ति और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा के लिए पारदर्शी व्यवस्था समय की आवश्यकता है और इसके लिए सनातन बोर्ड एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है.

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