संस्कारधानी जबलपुर के मदन महल के रतन नगर में स्थित सुप्तेश्वर गणेश मंदिर विघ्नहर्ता के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। यहां पर 25 फिट विशालकाय चट्टान में भगवान श्रीगणेश विराजमान हैं, जो 100 वर्गफीट क्षेत्र को घेरे हुए हैं। विघ्नहर्ता गणेश की इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए न केवल भारत से बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि जबलपुर के राइट टाउन क्षेत्र में रहने वाली सुधा राजे के सपने में आकर भगवान श्रीगणेश ने स्वयं मंदिर स्थापना की बात कही थी, काफी लंबे समय तक खोज करने के बाद मदन महल के रतन नगर क्षेत्र में इस विशालकाय चट्टान में भगवान श्रीगणेश का आकार दिखाई दिया, तत्पश्चात 1989 में इस विशालकाय सुप्तेश्वर गणेश की प्राण प्रतिष्ठा की गई और श्रद्धालुओं के द्वारा सिंदूर लगाकर भगवान श्रीगणेश को कल्कि अवतार में पूजा जाने लगा।
41 दिन दीप जलाने से पूरी होती है मनोकामना
ऐसी मान्यता है कि जो भी इस सिद्ध गणेश मंदिर में लगातार 41 दिन सच्चे मन से दीप जलाता है और विघ्नहर्ता की आराधना करता है, उसके सभी दुख दर्द दूर हो जाते हैं और उसकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
घोड़े पर सवार हैं गणपति
भगवान गणेश का वाहन चूहा है लेकिन सुप्तेश्वर गणेश मंदिर में स्थित प्रतिमा में वे घोड़े पर सवार हैं। यहां स्थित भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा काफी विशाल है, कहा जाता है कि प्रतिमा पाताल तक समाई है। सिर्फ भगवान श्रीगणेश की विशाल सूंड धरती के बाहर नजर आती है, जबकि शेष शरीर धरती के अंदर है।











