Monday, September 14, 2026
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शारदीय नवरात्रि 2024: कब है महाष्टमी और नवमी? जानें सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्मावलंबियों के प्रमुख धार्मिक त्यौहार शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी और नवमी तिथि को लेकर माता के भक्त असमंजस में हैं। शारदीय नवरात्रि का आरंभ बुधवार 3 अक्तूबर 2024 को हुआ था। वहीं हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि का आरंभ आज गुरुवार 10 अक्टूबर को दोपहर 12:31 बजे से होगा और इसका समापन शुक्रवार 11 अक्टूबर को सुबह 12:05 बजे होगा, इसके तुरंत बाद ही नवमी तिथि आरंभ हो जायेगी।

उदयातिथि के अनुसार अष्टमी और नवमी का व्रत शुक्रवार 11 अक्टूबर को रखा जाएगा। वहीं इसके अगले दिन यानी शनिवार 12 नवंबर 2024 को विजया दशमी मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार अष्टमी और नवमी के दिन पूजा के लिए बेहद शुभ मुहूर्त है। पूजा का मुहूर्त सुबह 6:20 बजे आरंभ होगा जो 7:47 बजे तक रहेगा। इसके अलावा उन्नती मुहूर्त का आरंभ सुबह 7:47 बजे से होगा, जो सुबह 9:14 बजे तक रहेगा, वहीं अमृत मुहूर्त सुबह 9:14 बजे से आरंभ होगा और ये सुबह 10:41 बजे तक रहेगा।

नवरात्रि की अष्टमी को माँ महागौरी की पूजा की जाती है और नवरात्रि की नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी को माँ महागौरी की आराधना-उपासना का विधान है। माँ की शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। माँ की उपासना से भक्तों को सभी क्लेश धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं जाते। वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है।

माँ महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ महागौरी का ध्यान, स्मरण, पूजन, आराधना भक्तों के लिए कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। माँ महागौरी भक्तों का कष्ट अवश्य ही दूर करती हैं। माँ महागौरी की उपासना से आर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। पुराणों में माँ महागौरी की महिमा को अपरम्पार बताया गया है। माँ मनुष्य की वृत्तियों को सत्‌ की ओर प्रेरित करके असत्‌ का विनाश करती हैं।

माँ महागौरी का ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

माँ महागौरी का स्तोत्र
सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

नवरात्रि की नवमीं को माँ दुर्गा के नौवें रूप माँ सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि के नौवें दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व, ये आठ सिद्धियाँ होती हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है। जो इस प्रकार हैं, अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व-वाशित्व, सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञत्व, दूरश्रवण, परकायप्रवेशन, वाक्‌सिद्धि, कल्पवृक्षत्व, सृष्टि, संहारकरणसामर्थ्य, अमरत्व, सर्वन्यायकत्व, भावना, सिद्धि। माँ सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं।

या देवी सर्वभू‍तेषु मातृ रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है।

माँ सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥
स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

माँ सिद्धिदात्री का स्त्रोत
कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।
नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोस्तुते॥
परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोस्तुते॥
धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोस्तुते॥

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