Friday, April 24, 2026
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विक्रम संवत 2082: 30 मार्च 2025 को है गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि और नव-संवत्सर का आरंभ

हिन्दू पंचांग में 12 मास होते हैं, हिन्दू पंचांग का आरंभ चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से होता है और समापन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि के आरंभ के साथ ही हिन्दू नववर्ष अर्थात नव-संवत्सर का शुभारंभ भी होता है।

चैत्र मास हिन्दू पंचांग का पहला महीना है और फाल्गुन मास अंतिम महीना है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नव-संवत्सर, गुड़ी पडवा, युगादि के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष हिन्दू नववर्ष अर्थात नव-संवत्सर रविवार 30 मार्च 2025 से आरंभ हो रहा है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ शनिवार 29 मार्च 2025 को शाम 4:27 बजे से होगा और समापन रविवार 30 मार्च 2025 को दोपहर 12:49 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ विवार 30 मार्च 2025 से होगा। ब्रह्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की थी। वहीं रविवार 6 अप्रैल 2025 राम नवमी के दिन चैत्र नवरात्रि का समापन होगा।

चैत्र मासि जगत ब्रह्मा संसर्ज प्रथमेऽहनि।
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदय सति।।

अर्थात- ब्रह्माजी ने जब सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ किया तो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ‘प्रवरा’ तिथि घोषित किया। इसके अलावा भगवान विष्णु के मत्स्यावतार का अविर्भाव और सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था। प्रवरा तिथि का महत्व देखते हुए भारत के सम्राट विक्रमादित्य ने भी अपने संवत्सर का आरंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही किया था, इसलिए इसे विक्रम संवत भी कहा जाता है।

इसके साथ ही रविवार 30 मार्च 2025 से नव-संवत्सर विक्रम संवत 2082 का आरंभ हो जाएगा। इस संवत के राजा सूर्यदेव होंगे। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ होगा। हिन्दू नववर्ष के पहले दिन माँ दुर्गा की पूजा, शुभ मुहूर्त में घर में कलश स्थापना करना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इससे सालभर सुख-समृद्धि का वास होता है, जीवन में कष्टों का नाश होता है, आर्थिक-मानसिक और शारीरिक परेशानियां खत्म होती है।

हिन्दू नववर्ष के प्रथम चैत्र मास के पहले नौ दिनों का विशेष महत्व है, भारत में इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, चैत्र मास में आने वाली इस नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि का कहा जाता है।

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