राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज बाजपेयी एक बार फिर अपने दमदार अभिनय और जबरदस्त रूपांतरण से दर्शकों को चौंकाने के लिए तैयार हैं। फिल्मकार सुधीर मिश्रा की आगामी ऐतिहासिक फिल्म में वह पहली बार महात्मा गांधी की भूमिका निभाते नजर आएंगे। रविवार को फिल्म का पहला लुक जारी किया गया, जिसमें मनोज बाजपेयी को पहचानना तक मुश्किल हो रहा है। सिर पर बाल नहीं, साधारण धोती, हाथ में लाठी और चेहरे पर गंभीर भाव लिए अभिनेता पूरी तरह गांधी के व्यक्तित्व में ढले दिखाई दे रहे हैं।
पहली झलक सामने आते ही फिल्म को लेकर दर्शकों और फिल्म जगत में चर्चा तेज हो गई है। तस्वीर में गांधी के रूप में नजर आ रहे मनोज बाजपेयी के पीछे कई स्वतंत्रता सेनानी दिखाई देते हैं, जबकि पृष्ठभूमि में ‘लॉन्ग लिव महात्मा गांधी’ लिखा बैनर नजर आता है। कैमरे की ओर देखने के बजाय ऊपर की तरफ देखते उनके हावभाव और सादगी भरी वेशभूषा फिल्म के गंभीर ऐतिहासिक विषय की झलक देती है।
पहली बार महात्मा गांधी के किरदार में नजर आएंगे
मनोज बाजपेयी ने अपने लंबे फिल्मी करियर में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई हैं. गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता अब भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक महात्मा गांधी की भूमिका निभाने जा रहे हैं.
यह पहली बार है जब मनोज बाजपेयी पर्दे पर महात्मा गांधी का किरदार निभाएंगे. ऐसे में फिल्म का पहला लुक सामने आने के साथ ही इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है कि अभिनेता गांधी के व्यक्तित्व, विचारों और भावनात्मक पक्ष को किस तरह पर्दे पर प्रस्तुत करते हैं.
मनोज बाजपेयी इससे पहले भी ऐसे किरदार निभा चुके हैं जिनमें उन्होंने अपने शारीरिक हावभाव, आवाज, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमा में बड़ा बदलाव किया है. गांधी की भूमिका उनके लिए अब तक की सबसे अलग चुनौतियों में से एक मानी जा सकती है.
सुधीर मिश्रा के निर्देशन में बन रही ऐतिहासिक फिल्म
फिल्म का निर्देशन चर्चित फिल्मकार सुधीर मिश्रा कर रहे हैं. सुधीर मिश्रा को सामाजिक और राजनीतिक विषयों को गंभीरता से पर्दे पर प्रस्तुत करने के लिए जाना जाता है. ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ और ‘धारावी’ जैसी फिल्मों के निर्देशन के लिए उनकी विशेष पहचान रही है.
नई फिल्म भी भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है. हालांकि फिल्म का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. निर्माताओं ने इसकी रिलीज तारीख की भी घोषणा नहीं की है.
फिल्म में अभिनेता सौरभ शुक्ला भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे. हालांकि उनके किरदार और कहानी में उनकी भूमिका को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.
आजादी की लड़ाई के 21 दिनों की कहानी
निर्माताओं की ओर से फिल्म की कहानी को लेकर बहुत ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार यह फिल्म भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के 21 दिनों के एक अपेक्षाकृत कम चर्चित दौर पर आधारित है.
यह अवधि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में किस घटना या घटनाक्रम से जुड़ी है, इसे लेकर फिलहाल फिल्म निर्माताओं ने अधिक जानकारी साझा नहीं की है. कहानी को लेकर गोपनीयता बरकरार रखी गई है. यही वजह है कि फिल्म की कहानी, पात्रों और घटनाक्रम को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है.
निर्माताओं के अनुसार फिल्म का उद्देश्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ को केवल घटनाओं के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उसके मानवीय और भावनात्मक पक्ष को भी सामने लाना है. फिल्म में उस दौर के संघर्ष, भावनाओं और निर्णयों को केंद्र में रखकर कहानी कहने का प्रयास किया जाएगा.
तस्वीर में गांधी के पारंपरिक रूप में नजर आए मनोज
फिल्म से सामने आई तस्वीरों में मनोज बाजपेयी का रूपांतरण खास तौर पर ध्यान खींच रहा है. अभिनेता गांधी की तरह गंजे सिर, साधारण वस्त्र और हाथ में लाठी लिए दिखाई दे रहे हैं. उनका चेहरा और शरीर की मुद्रा भी महात्मा गांधी के व्यक्तित्व के अनुरूप तैयार की गई है.
तस्वीर में गांधी बने मनोज बाजपेयी के पीछे स्वतंत्रता सेनानियों का समूह दिखाई देता है. इससे संकेत मिलता है कि कहानी में स्वतंत्रता आंदोलन और उसके दौरान गांधी की भूमिका को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है.
पृष्ठभूमि में दिखाई देने वाला ‘लॉन्ग लिव महात्मा गांधी’ का बैनर भी फिल्म के समय और वातावरण को स्थापित करने की कोशिश करता है. हालांकि फिल्म की पूरी कहानी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह दृश्य किस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है.
निर्माताओं ने कहानी को रखा है गोपनीय
फिल्म को लेकर निर्माताओं ने फिलहाल सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की है. फिल्म का शीर्षक भी अभी तय रूप में घोषित नहीं किया गया है. रिलीज की तारीख को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
निर्माताओं की ओर से कहानी के बारे में केवल इतना संकेत दिया गया है कि फिल्म इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ की भावनात्मक और मानवीय कहानी प्रस्तुत करेगी. इससे माना जा रहा है कि फिल्म केवल गांधी के राजनीतिक जीवन पर केंद्रित न होकर उनके व्यक्तित्व और उस दौर से जुड़े मानवीय संघर्षों को भी सामने ला सकती है.
अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत हैं निर्माता
फिल्म का निर्माण अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत कर रहे हैं. इसे बनारस मीडिया वर्क्स के बैनर तले तैयार किया जा रहा है, जबकि एनएच स्टूडियोज इसे प्रस्तुत कर रहा है.
फिल्म के निर्माण से जुड़े लोगों ने इसे एक ऐसी ऐतिहासिक कहानी के रूप में पेश किया है, जिसमें स्वतंत्रता संघर्ष के कम चर्चित हिस्से को नए नजरिए से सामने लाने की कोशिश की जाएगी. सुधीर मिश्रा के निर्देशन और मनोज बाजपेयी की मुख्य भूमिका ने परियोजना को लेकर उम्मीदें और बढ़ा दी हैं.
मनोज बाजपेयी की एक और बड़ी फिल्म जल्द आएगी
मनोज बाजपेयी के पास इस समय कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हैं. उनकी अगली फिल्मों में ‘लास्ट मैन इन टावर’ भी शामिल है. इस फिल्म में उनके साथ बोमन ईरानी और दिव्या दत्ता नजर आएंगी.
फिल्म का निर्देशन बेन रेखी कर रहे हैं और इसका निर्माण राणा दग्गुबाती की स्पिरिट मीडिया के बैनर तले किया गया है. यह फिल्म प्रसिद्ध लेखक अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है.
‘लास्ट मैन इन टावर’ में पहली बार मनोज बाजपेयी और बोमन ईरानी एक साथ पर्दे पर नजर आएंगे. फिल्म 11 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
गांधी के रूप में मनोज की झलक ने बढ़ाई उम्मीद
मनोज बाजपेयी के गांधी रूप की पहली झलक सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिल्म में उनका अभिनय किस स्तर तक दर्शकों को प्रभावित करता है. गांधी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व को पर्दे पर निभाना केवल वेशभूषा और शारीरिक रूपांतरण तक सीमित नहीं है. उनकी भाषा, चाल-ढाल, विचारों की अभिव्यक्ति और भावनात्मक गहराई को भी विश्वसनीय बनाना बड़ी चुनौती होगी.
मनोज बाजपेयी के अभिनय अनुभव को देखते हुए दर्शकों की निगाहें अब फिल्म के अगले अपडेट पर टिकी हैं. फिल्म का शीर्षक, रिलीज तारीख और कहानी से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने के बाद इसकी तस्वीर और स्पष्ट होगी. फिलहाल उनकी पहली झलक ने इतना जरूर कर दिया है कि महात्मा गांधी के किरदार में मनोज बाजपेयी को देखने के लिए दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है.








