Sunday, September 6, 2026
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yash की ‘टॉक्सिक’ ने मचाया धमाल , गैंगस्टर अवतार, एक्शन और इमोशन का जबरदस्त तड़का

‘KGF 2’ के बाद करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद यश ने बड़े पर्दे पर दमदार वापसी की है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1940 से 1970 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें हिंसा, अंडरवर्ल्ड, साजिश और पारिवारिक भावनाओं का जबरदस्त मेल देखने को मिलता है। यश का खतरनाक गैंगस्टर अवतार, उनका डबल रोल और नयनतारा, कियारा आडवाणी व हुमा कुरैशी की शानदार अदाकारी फिल्म को खास बनाती है। हाई-वोल्टेज एक्शन, इमोशनल ट्विस्ट और क्राइम की रोमांचक दुनिया से भरपूर ‘टॉक्सिक’ उन दर्शकों को खास तौर पर पसंद आ सकती है, जिन्हें बड़े पर्दे पर दमदार एक्शन और गैंगस्टर ड्रामा देखना पसंद है।.

कहानी की बात करें तो –

क्या होता है जब क्राइम की खौफनाक दुनिया में बारूद के धुएं और गोलियों की गूंज के बीच रिश्तों और इमोशंस का तूफान दस्तक देता है? ‘टॉक्सिक’ इसी सवाल का जवाब अपने डार्क, इंटेंस और हाई-वोल्टेज अंदाज में देती है। फिल्म सिर्फ हिंसा और गैंगवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पावर, लॉयल्टी, परिवार, प्यार और बदले की ऐसी उलझी हुई कहानी पेश करती है, जो दर्शकों को लगातार बांधे रखती है। कहानी अंडरवर्ल्ड और इंटरनेशनल ड्रग एम्पायर में अपनी धाक जमा चुके राया के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी में उसके बेटे टिकट की एंट्री एक बड़ा बदलाव लेकर आती है। टिकट के जरिए राया के व्यक्तित्व का वह पहलू सामने आता है, जो अब तक छिपा हुआ था। नयनतारा की गंगा और कियारा आडवाणी की नादिया कहानी में इमोशनल गहराई जोड़ती हैं, जबकि हुमा कुरैशी की एलिजाबेथ खतरनाक नेगेटिव शेड के साथ अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराती हैं। वहीं रुक्मिणी वसंत का मेलिसा किरदार कहानी का सरप्राइज पैकेज बनकर उभरता है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश का डबल अवतार और उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस है। दोनों किरदारों की बॉडी लैंग्वेज, अंदाज और व्यवहार में इतना फर्क रखा गया है कि उनकी अलग पहचान तुरंत महसूस होती है। गीतू मोहनदास का निर्देशन कहानी को एक मल्टी-लेयर्ड स्ट्रक्चर देता है, जहां हर किरदार की अपनी बैकस्टोरी और मकसद है। फिल्म का पहला हाफ किरदारों और राया के साम्राज्य की नींव तैयार करने में समय लेता है, इसलिए इसकी शुरुआत कुछ दर्शकों को धीमी लग सकती है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म पूरी तरह गियर बदल देती है।

दूसरे हाफ में एक्शन, सस्पेंस और रॉ वायलेंस का स्तर तेजी से बढ़ता है और क्लाइमैक्स तक फिल्म अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखती है। टेक्निकल फ्रंट पर फिल्म बेहद प्रभावशाली है। खासतौर पर बैकग्राउंड स्कोर और साउंड डिजाइन एक्शन सीक्वेंस को और ज्यादा खतरनाक और इंटेंस बना देते हैं। हालांकि 194 मिनट का लंबा रनटाइम, धीमी शुरुआत, जरूरत से ज्यादा हिंसा और कुछ जगहों पर उलझी हुई स्क्रिप्ट फिल्म की कमजोर कड़ियां हैं।

कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ सिर्फ गोलियों और खून-खराबे की कहानी नहीं, बल्कि गुस्से, रिश्तों, वफादारी और बदले का ऐसा डार्क कॉकटेल है, जो बड़े पर्दे पर अपने विजुअल्स और एक्शन से असर छोड़ता है। अगर आपको दमदार गैंगस्टर ड्रामा, रॉ एक्शन और इमोशनल ट्विस्ट पसंद हैं, तो ‘टॉक्सिक’ आपकी वॉचिंग लिस्ट में जगह बना सकती है।

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