Friday, October 23, 2026
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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर लगेगी लगाम, मोदी सरकार ने गठित किया संयुक्त कार्य समूह

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर लगेगी लगाम: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए परामर्श जारी किया है कि उनके प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न की प्रकृति के भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहार में शामिल न हों।

सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को सलाह दी गई है कि वे परामर्श जारी होने के 3 महीने के भीतर डार्क पैटर्न की पहचान करने के लिए स्‍व-ऑडिट करें और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं कि उनके प्लेटफॉर्म ऐसे डार्क पैटर्न से मुक्त हों।

स्‍व-ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को यह भी स्व-घोषणा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है कि उनका प्लेटफॉर्म किसी भी डार्क पैटर्न में लिप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म स्व-घोषणा से उपभोक्ताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बीच विश्वास बनाने के साथ-साथ निष्पक्ष डिजिटल तंत्र बना पाएगा।

सीसीपीए ने कुछ मामलों में डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते पाए गए ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को नोटिस भी जारी किए हैं। इसलिए सभी ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को भ्रामक डिज़ाइन इंटरफ़ेस का उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है जो उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं या उनके निर्णय लेने में हेरफेर करते हैं। प्राधिकरण डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर कड़ी नज़र रख रहा है। ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर डार्क पैटर्न के मामले देखे गए हैं।

भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) का गठन किया है। इसमें संबंधित मंत्रालयों, नियामकों, स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों और एनएलयू के प्रतिनिधि शामिल हैं। इस जेडब्‍ल्‍यूजी का कार्य ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर डार्क पैटर्न के उल्लंघन की पहचान करने के लिए जाँच करना और उपाय करना तथा नियमित अंतराल पर उपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ जानकारी साझा करना है। जेडब्‍ल्‍यूजी उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता उत्‍पन्‍न  करने के लिए उचित जागरूकता कार्यक्रम भी सुझाएगा।

डिजिटल युग में उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने और ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं में अनुचित प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की व्यापक रणनीति और चल रहे प्रयासों के हिस्से के रूप में, भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने 2023 में डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश अधिसूचित किए थे और 13 डार्क पैटर्न अर्थात्: झूठी तत्काल आवश्‍यकता, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, जबरन कार्रवाई, सदस्यता जाल, इंटरफेस हस्तक्षेप, चारा और स्विच, ड्रिप मूल्य निर्धारण, प्रच्छन्न विज्ञापन और सता, ट्रिक वर्डिंग, सास बिलिंग और दुष्ट मैलवेयर निर्दिष्ट किए थे।

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