महाकाल की नगरी उज्जैन से इस बार होली को लेकर विशेष खबर सामने आई है। फाल्गुन पूर्णिमा यानी 3 मार्च को धुलेंडी के दिन ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण का सूतक सुबह 6:47 बजे से शुरू होकर ग्रहण मोक्ष तक प्रभावी रहेगा। ऐसे में शाम 6:47 बजे तक सूतक काल माना जाएगा।
पानी से होली खेलने से परहेज की सलाह
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्रमा को जल तत्व का स्वामी माना जाता है। इसलिए ग्रहण के दिन जल से जुड़े कार्यों से बचने की सलाह दी गई है। इस बार पानी वाली होली के बजाय सूखे गुलाल और अबीर से होली खेलना अधिक शुभ माना जा रहा है।
मान्यता है कि ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस दौरान घर में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करना फलदायी बताया गया है।
ग्रहण के बीच भी निकलेगी पारंपरिक गैर
उज्जैन में धुलेंडी पर सिंहपुरी और कार्तिक चौक से पारंपरिक गैर निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। इस बार भी गैर निकलेगी, लेकिन विशेष सावधानी बरती जाएगी। आयोजन समितियां धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम संपन्न कराने की तैयारी कर रही हैं।
होलिका दहन और भद्रा काल
वैदिक पंचांग के अनुसार 2 मार्च की रात होलिका दहन होगा। शाम 5:55 बजे से भद्रा काल प्रारंभ होकर 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा। पंडितों के अनुसार इस बार भद्रा भू-लोक में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। इस अवधि में दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ माना गया है।











