Friday, April 24, 2026
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जबलपुर के केंद्रीय रेलवे अस्पताल सहित सभी केंद्रीय प्रतिष्ठानों के हॉस्पिटल्स राज्य सरकार के अधीन होंगे, आदेश जारी

नई दिल्ली/जबलपुर. आयुष्मान भारत पीएम जन आरोग्य योजना के तहत भारत सरकार ने अपने सभी केंद्रीय मंत्रालयों के अस्पतालों जिनमें रेलवे भी शामिल है को राज्य सरकारा के स्वास्थ्य विभाग के अधीन करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर स्थित केंद्रीय चिकित्सालय सहित देश के 76 रेलवे अस्पतालों का नियंत्रण अगले एक माह के अंदर स्थानांतरित हो जायेगा। इस निर्णय के बाद इन रेलवे अस्पतालों में भी आम लोग पीएम स्वास्थ्य योजना के तहत उपचार करा सकेंगे.
केंद्र सरकार के इस आदेश के बाद गत 18 अगस्त 2025 को रेलवे ने सभी रेल जोनों को इस संंबध में एक पत्र भी जारी किया है. जिसमें रेलवे अस्पतालों की सूची भी की गई है, जिन्हें राज्य का हेल्थ डिपार्टमेंट टेकओवर करेगा।

पमरे के ये हास्पिटल्स होंगे स्थानांतरित

रेलवे बोर्ड ने देश के 76 अस्पतालों की सूची जारी की है, उसमें पश्चिम मध्य रेलवे के अस्पतालों में जबलपुर के केंद्रीय चिकित्सालय, कोटा का मंडल चिकित्सालय व भोपाल मंडल के अंतर्गत इटारसी का सब चिकित्सालय शामिल है।

इन अस्पतालों में आम लोग भी स्वास्थ्य योजना में उपचार करा सकेंगे

बताया जाता है कि केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद जारी की गई केंद्रीय मंत्रालयों के अस्पतालों में आम लोग भी प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अपना उपचार करा सकेंगे. उन्हें अपने घर के समीप ही बेहतर उपचार की व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। इन अस्पतालों का प्रबंधन पूरी तरह से राज्य सरकार के पास पहुंच जायेगा. यहां पर केवल रेलवे के अधिकारी नोडल की भूमिका में रहेंगे.

रेल कर्मचारी उपचार को तरस रहे, आम लोगों का क्या हाल होगा

केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद रेल कर्मचारियों, पेेंशनर्स, उनके परिजन जो रेलवे अस्पतालों में उपचार कराते हैं, वे पहले से यहां की जर्जर हो चुकी चिकित्सा व्यवस्था से परेशान हैं. चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ की भारी कमी, दवाइयों का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होना, जैसी समस्याओं से वे परेशान हैें. अब नये निर्णय से जब आम लोग भी यहां पर स्वास्थ्य योजना में उपचार कराने आयेंगे तब स्वास्थ्य व्यवस्था कैसी होगी, इस पर कर्मचारी सवालिया निशान लगा रहे हैं.

इस व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

1. सरकारी अस्पतालों का राज्य अस्पतालों में विलय किया जाएगा और अस्पतालों में योजना का प्रशासनिक नियंत्रण एनएचए से संबंधित एसएचए को हस्तांतरित किया जाएगा। पहचान के लिए एनएचए की एचईएम और टीएमएस प्रणाली में एक अतिरिक्त श्रेणी पब्लिक-सरकारी अस्पताल बनाई जाएगी।
2. केेंद्र सरकार के अस्पताल (जीओआई) वर्तमान में राष्ट्रीय पैकेज मास्टर का पालन कर रहे हैं। अस्पतालों में योजना का प्रशासनिक नियंत्रण एनएचए (नेशनल हेल्थ अथारिटी) से एसएचए (स्टेट हेल्थ अथारिटी) को हस्तांतरित होने पर, संबंधित राज्यों की स्वास्थ्य प्रोत्साहन संरचना के साथ अस्पतालों पर लागू होगी।

3. चूकि राज्य सरकार भारत सरकार के अस्पतालों को कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं कर रही है। इसलिए, सार्वजनिक अस्पतालों को प्रतिपूर्ति किए गए दावे के भुगतान हेतु रिवॉल्विंग फंड का प्रावधान भारत सरकार (जीओआई) के अस्पतालों पर लागू नहीं होगा। एक अतिरिक्त श्रेणी सार्वजनिक-जीओआई अस्पताल इस सुविधा को भी संबोधित करने में मदद करेगी।
4. संबंधित एसएचए राज्य में सूचीबद्ध सार्वजनिक अस्पतालों को प्रदान की जाने वाली सहायता के समान सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे।
5. जो राज्य अपनी स्वयं की आईटी प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, वे अस्पताल को एक नई इकाई के रूप में अपनी प्रणाली में जोड़ेंगे, जबकि एनएचए आईटी प्रणाली पर अस्पताल का पिछला डेटा उसी अस्पताल कोड के साथ जारी रहेगा और एपीआई के माध्यम से नया डेटा उसी अस्पताल कोड पर मैप किया जाएगा।
6. आईईसी, पीएमएएम की लागत संबंधित अस्पताल द्वारा वहन की जाएगी और वे अपनी आईटी अवसंरचना आवश्यकताओं का प्रबंधन भी स्वयं करेंगे।
7. गैर-पीएमजेएवाई कार्यान्वयन वाले राज्यों के अस्पतालों पर आज की तारीख में एनएचए का प्रशासनिक नियंत्रण जारी रहेगा।

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