Friday, April 24, 2026
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मालदीव ने किया संसदीय संसाधनों के डिजिटलीकरण हेतु भारत से सहयोग का अनुरोध

लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने मालदीव के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों को दोहराया। उन्होंने इस द्वीपीय देश को न केवल एक मित्रवत पड़ोसी, बल्कि भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘सागर’ दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी बताया। ओम बिरला ने ये बातें संसद भवन में मालदीव की पीपुल्स मजलिस के अध्यक्ष अब्दुल रहीम अब्दुल्ला के नेतृत्व में आए मालदीव के शिष्टमंडल के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कहीं।

चर्चा के दौरान ओम बिरला ने विधायी दक्षता बढ़ाने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ डिजिटल बदलाव के मामले में भारतीय संसद द्वारा की गई प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिष्टमंडल को बताया कि भारतीय संसद अब 15 क्षेत्रीय भाषाओं में एक साथ अनुवाद सेवाएं प्रदान करती है और जल्द ही विस्तारित करके इस सेवा को 22 भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा।

मालदीव की पीपुल्स मजलिस के अध्यक्ष ने भारतीय संसद द्वारा प्रौद्योगिकी के उपयोग, डिजिटलीकरण कार्य एवं एआई के उपयोग की सराहना की और ओम बिरला से मालदीव की मजलिस को अपने संसदीय संसाधनों को डिजिटल बनाने में सहयोग करने हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया। ओम बिरला ने उन्हें इस संबंध में भारतीय संसद की ओर से मालदीव की पीपुल्स मजलिस को हरसंभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।

शिष्टमंडल का हार्दिक स्वागत करते हुए ओम बिरला ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्ष राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों में नए सिरे से आई गति पर प्रकाश डाला। उन्होंने उम्मीद जताई कि मालदीव के संसदीय शिष्टमंडल के दौरे से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

क्षमता निर्माण संबंधी पहल पर चर्चा करते हुए, लोकसभाध्यक्ष ने संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में प्रशिक्षण प्रदान करने में प्राइड (पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज) की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मालदीव की संसद तथा सचिवालय को प्राइड की विशेषज्ञता से लाभ होगा। ओम बिरला ने आशा व्यक्त की कि इस यात्रा से भारत और मालदीव के विधायी संस्थानों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

लोकसभाध्यक्ष ने शिष्टमंडल को सूचित किया कि भारत वर्तमान में अपने संविधान, जोकि देश के जीवंत संसदीय लोकतंत्र की आधारशिला और राष्ट्र की यात्रा में प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य करता है, के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। भारत की संसदीय समिति प्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए, ओम बिरला ने इन समितियों को “मिनी-संसद” के रूप में वर्णित किया, जहां प्रमुख बजटीय एवं नीतिगत मामलों की गहराई से जांच की जाती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये समितियां गैर-पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्य करती हैं, जिससे विस्तृत विचार-विमर्श संभव हो पाता है जो अक्सर समय की सीमाओं के कारण बड़े सदन में बाधित होता है। उन्होंने शिष्टमंडल को सूचित किया कि विभिन्न समितियां वर्तमान में संसद में पेश किए गए बजट की जांच कर रही हैं, ताकि मजबूत वित्तीय निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

अब्दुल रहीम अब्दुल्ला ने गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए श्री बिरला को धन्यवाद दिया और भारतीय संसद की डिजिटल प्रगति, विशेष रूप से एआई के उपयोग की सराहना की। उन्होंने संसद के पुस्तकालय का भी दौरा किया और वहां की सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि मालदीव की संसद के पुस्तकालय में भी इसी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी।

इस बैठक में सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन, आशीष दुबे, फ्रांसिस जॉर्ज, आलोक कुमार सुमन, शफी पेराम्बिल और लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने भी भाग लिया। इससे पूर्व मालदीव की पीपुल्स मजलिस के स्पीकर अब्दुल रहीम अब्दुल्ला के नेतृत्व में संसदीय शिष्टमंडल ने लोकसभा की कार्यवाही देखी। ओम बिरला ने सदन में शिष्टमंडल का स्वागत किया।

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