Wednesday, February 11, 2026
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MP High Court : 25 साल बाद बर्खास्तगी का आदेश निरस्त, क्लास-थ्री कर्मचारी होंगे बहाल, मिलेगा बैकवेजय

जबलपुर। एमपी के जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में जिला न्यायालय जबलपुर में कार्यरत क्लास-थ्री कर्मचारियों की 22 से 25 साल पुरानी सेवाएं समाप्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया है।

जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1994-95 में हुई ये नियुक्तियां अवैध या शुरू से शून्य नहीं थीं, बल्कि इनमें केवल प्रक्रियागत त्रुटियां थीं। जो लंबे समय तक सेवा में बने रहने से स्वत: समाप्त मानी जाएंगी।

हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ता कर्मचारियों को उनके संबंधित पदों पर बहाल करने के निर्देश देते हुए बैकवेज, पदोन्नति सहित सेवा से जुड़े सभी लाभ देने के आदेश भी दिए हैं। जबलपुर निवासी राजीव काशिव, सुधीर पटेल, मोहम्मद शमीम सहित अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पक्ष रखा।

उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति जिला न्यायालय जबलपुर में क्लास-थ्री पदों पर तत्कालीन सरकार की एक विशेष योजना के तहत की गई थी। याचिकाकर्ताओं के माता-पिता शासकीय सेवक थे, जिन्होंने मध्यप्रदेश सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के नियम-42 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी।

इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आयोजित किए गए और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई। हालांकि बाद में सरकार ने उक्त योजना को वापस ले लिया।

करीब 22 वर्षों से अधिक की सेवा के बाद वर्ष 2017 में मनसुख लाल सराफ बनाम अरुण कुमार तिवारी प्रकरण के आधार पर जांच की गई। इसके बाद यह कहते हुए सेवाएं समाप्त कर दी गईं कि नियुक्तियां अनुकंपा नीति और मेडिकल परीक्षण नियमों के विपरीत थीं।

खंडपीठ ने कहा कि यदि नियुक्तियां पूरी तरह से अवैध या शून्य होतीं तो इतनी लंबी अवधि तक सेवा में बने रहना संभव नहीं होता। प्रक्रियागत खामियों के आधार पर दशकों बाद सेवाएं समाप्त करना न तो न्यायसंगत है और न ही कानूनन उचित।

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