Friday, April 24, 2026
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मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने कहा…..

जबलपुर। एमपी के जबलपुर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर की जा रही सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। आज मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल द्वारा जारी भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रखने के निर्देश दिए हैं। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में एसोसिएट प्रोफेसर के 40 पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिका में तर्क दिया गया कि ये सभी 40 पद वर्ष 2024 में स्वीकृत हुए हैं। नियमों के अनुसार इन्हें पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना चाहिए। मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल घगट की अदालत में हुई।

राज्य शासन की ओर से मौखिक आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया कि पदोन्नति संभव न होने की स्थिति में सीधी भर्ती का विकल्प अपनाया जा सकता है। इस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता पंकज दुबेए अजीत शुक्ला और सोनाली पांडे ने दलील दी कि पदोन्नति न करने का कोई कारण स्पष्ट नहीं किया गया हैए जबकि याचिकाकर्ता पूरी तरह योग्य हैं और उनसे लगातार कार्य लिया जा रहा है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल द्वारा की जा रही एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखते हुएए मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल और भारतीय नर्सिंग काउंसिल को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने प्रकरण की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद नियत की है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए वर्तमान में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों की पात्रता और अनुभव निर्धारित है।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में करीब 12 महिला डॉक्टर असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं जो आवश्यक योग्यता और अहर्ता रखती हैं। इसके बावजूद शासन पदोन्नति की प्रक्रिया अपनाने के बजाय इन पदों को अवैधानिक रूप से सीधी भर्ती से भरने का प्रयास कर रहा है।

याचिकाकर्ता डॉक्टर प्रवीण सूर्यवंशी, डॉक्टर श्वेता ठाकुर, डॉक्टर गायत्री वर्मा सहित अन्य की ओर से कहा गया कि वर्ष 2024 में स्वीकृत पदों के लिए पदोन्नति प्रक्रिया पूरी न करने का शासन के पास कोई ठोस कारण नहीं है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर सीधी भर्ती को चुनौती दी।

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